चन्देल वंश का इतिहास

Chandel Vansh History in Hindi

 प्रतिहार -वंश के पतन के बाद मध्य भारत में चंदेल वंश (चन्द्रात्रेय) का उदय हुआ । ये चंद्रवंशी क्षत्रिय थे । इनका मूल प्रदेश बुन्देलखण्ड था । प्रारम्भ में ये गुर्जर- प्रतिहारों के सामन्त थे एवं इनकी राजधानी ‘खजुराहो’ थी । प्रारम्भ में इसकी राजधानी कालिंजर (महोबा) थी ।

चंदेल वंश की स्थापना एक राजपूत राजा नन्नुक (चंद्रवर्मन) ने 831ई. में की । इस वंश का प्रथम शासक नन्नुक का पौत्र जयसिंह अथवा जेजा के नाम पर यह प्रदेश जेजाकभुक्ति कहलाया ।

चंदेल वंश के शासक ( Chandela Dynasty Emperor List in Hindi)

चंदेल वंश का शासक शासन काल
नन्नुक 831- 845 ई.
वाक्पति चंदेल 845- 870 ई.
जयशक्ति चंदेल (विजय शक्ति ) 870- 900 ई.
राहिल चंदेल 900 ई.
हर्ष चंदेल 900- 925 ई.
यशोवर्मन चंदेल 925- 950 ई.
धंगदेव 950- 1003 ई.
गंडदेव 1003- 1017 ई.
विद्याधर 1017- 1029 ई.
विजयपाल 1030- 1045 ई.
देववर्मन 1050- 1060 ई.
कीर्तिसिंह चंदेल 1060- 1100 ई.
सल्लक्षवर्मन 1100-1115 ई.
जयवर्मन 1115 – 1119 ई.
पृथ्वीवर्मन 1120- 1129 ई.
मदनवर्मन 1129- 1162 ई.
यशोवर्मन द्वितीय 1165-1166 ई.
परमर्दिदेव 1166- 1202 ई.
Chandel Vansh history in Hindi
Chandel Vansh history in Hindi

चंदेल वंश का इतिहास (Chandel Vansh History in Hindi)

हर्ष

🔸राहिल का पुत्र तथा उत्तराधिकारी हर्ष इस वंश का एक शक्तिशाली राजा था ।

🔸खजुराहो लेख में इसे परमभट्टारक कहा गया है ।

🔸हर्ष वैष्णव धर्मावलंबी था ।

यशोवर्मन

🔸हर्ष का पुत्र एवं उत्तराधिकारी यशोवर्मन एक साम्राज्यवादी शासक था ।

🔸उसने मालवा, चेदि और मद्यकोशल पर आक्रमण करके अपने राज्य को पर्याप्त विस्तार किया ।

🔸चंदेल वंश का प्रथम स्वतंत्र एवं सबसे प्रतापी राजा यशोवर्मन था ।

🔸यशोवर्मन ने कन्नौज पर आक्रमण कर प्रतिहार राजा देवपाल को हराया तथा उसे विष्णु की प्रतिमा प्राप्त की, जिसे उसने खजुराहो के विष्णु मंदिर में स्थापित की ।

🔸इसने खजुराहो में लक्ष्मण मंदिर की स्थापना की ।

🔸यशोवर्मन ने खजुराहो के प्रसिद्ध विष्णु मंदिर (चतुर्भुज मंदिर) का निर्माण करवाया तथा इसके अतिरिक्त उसने एक विशाल जलाशय का भी निर्माण करवाया ।

धंगदेव

🔸यशोवर्मन का पुत्र धंगदेव चंदेल वंश का सर्वाधिक प्रतापी शासक था ।

🔸खजुराहो के अनेक मंदिर जैसे – जिन्ननाथ, वैद्यनाथ एवं विश्वनाथ मंदिरों का निर्माण करवाया ।

🔸इसके काल में बना विश्वनाथमंदिर सबसे अलंकृत मंदिर है ।

🔸कंदरिया महादेव मंदिर का निर्माण धंगदेव द्वारा 999 ईस्वी में किया गया ।

🔸राजा धंग ने अपनी राजधानी कालिंजर से खजुराहो में स्थानांतरण की थी ।

🔸प्रतिहारों उसे पूर्ण स्वतंत्रता का वास्तविक श्रेय धंग को जाता है ।

🔸धंग का साम्राज्य पश्चिम से ग्वालियर, पूर्व में वाराणसी, उत्तर में यमुना एवं दक्षिण में चेदि एवं मालवा तक फैला था ।

🔸धंग का प्रधानमंत्री प्रभास और प्रधान न्यायाधीश भट्टयशौधर था ।

🔸इसने गंगा- जमुना के संगम में शिव की आराधना करते हुए अपने शरीर का त्याग किया ।

🔸इसके बाद इसका पुत्र गण्ड शासक बना ।

विद्याधर

🔸गण्ड के बाद उसका पुत्र विद्याधर इस वंश का शासक बना ।

🔸चंदेल शासक विद्याधर ने कन्नौज के प्रतिहार शासक राज्यपाल की हत्या कर दी, क्योंकि उसने महमूद के आक्रमण का सामना किए बिना ही आत्मसमर्पण किया था ।

🔸विद्याधर ही अकेला ऐसा भारतीय नरेश था जिसने महमूद गजनी की महत्वकांक्षाओं का सफलतापूर्वक प्रतिरोध किया ।

🔸चंदेल शिलालेखों से पता चलता है कि विद्याधर के उत्तराधिकारी विजयपाल ने एक युद्ध में कलचूरी राजा गांगेयदेव को हराया था ।

कीर्तिवर्मन

🔸कलचुरी राजा गांगेयदेव का पुत्र लक्ष्मीकर्ण ने विजयपाल के बड़े पुत्र देववर्मन को पराजित कर दिया ।

🔸विजयपाल के छोटे पुत्र कीर्तिवर्मन ने लक्ष्मीकर्ण को हराकर चंदेल वंश की शक्ति को फिर से जीवित किया ।

🔸चंदेल शासक कीर्तिवर्मन की राज्यसभा में रहने वाले कृष्ण मिश्र ने प्रबोध चंद्रोदय की रचना की थी। इन्होंने महोबा के समीप कीर्तीसागर नामक जलाशय का निर्माण किया ।

परमर्दिदेव

🔸इस वंश का अंतिम शासक परमर्दिदेव था । इसके शासन में दो वीर योद्धा आल्हा और उदल थे ।

🔸आल्हा व उदल ने पृथ्वीराज चौहान के साथ युद्ध करते हुए अपनी जान गँवायी थी ।

🔸चंदेल वंश का अंतिम शासक परमर्दिदेव ने 1202 ईस्वी में कुतुबुद्दीन ऐबक की अधीनता स्वीकार कर ली । इस पर उसके मंत्री अजयदेव ने उसकी हत्या कर दी ।

Chandel Vansh History notes in Hindi

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