सिरोही के चौहान वंश का इतिहास

Sirohi ke Chauhan Vansh History in Hindi

 राजपूत राजवंशों की उत्पत्ति में हमने पिछली पोस्ट में शाकम्भरी एवं अजमेर के चौहान वंश, रणथम्भौर के चौहान वंश,जालौर के चौहान वंश की बात की थी । आज हम सिरोही के चौहान वंश की बात करेंगे । इसमें हम सिरोही के चौहानों का उदय, सिरोही के चौहानों का इतिहास , Sirohi Chauhan History , देवड़ा चौहान,लुम्बा,शिवसिंह आदि के बारे में जानकारी उपलब्ध कराएंगे ।

Sirohi ke Chauhan Vansh History in Hindi
Sirohi ke Chauhan Vansh History in Hindi

सिरोही के चौहान वंश के शासक

सिरोही के शासक देवड़ा के चौहान राजपूत थे । सिरोही के चौहान वंश का संस्थापक लुम्बा था , जिसने 1311 ईसवी में आबू और चंद्रावती को परमारों से छीन कर अपने राज्य की स्थापना की । सिरोही के शासकों राजधानी चंद्रावती और अचलगढ़ रहीं ।

🔸लुम्बा को सिरोही के चौहानों का आदि पुरुष कहा जाता है ।

🔸लुम्बा के उत्तराधिकारी क्रमश: तेजसिंह, कान्हड़देव, सामंतसिंह, सलखा और रायमल थे ।

🔸रायमल के पुत्र शिभान ने 1405 ईस्वी में शिवपुरी नामक नगर बसाया ।

🔸शिभान के पुत्र सहसमल में 1425 ई. में सिरोही को बसाया ।

🔸1451 ई. में सिरोही मेवाड़ के महाराणा कुंभा के अधिकार में आ गया ।

🔸अखैराज देवड़ा प्रथम , सिरोही का तेज गति से आक्रमण करने के कारण उड़ना अखैराज के नाम से जाना जाता है । अखैराज ने 1527 ई. में हुए खानवा के युद्ध में महाराणा सांगा का साथ दिया ।

🔸सिरोही के शासक शिवसिंह ने 1823 ई. में सिरोही राज्य की सुरक्षा के लिए ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ संधि की । सिरोही ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ संधि करने वाली अंतिम रियासत थी ।

🔸स्वतंत्रता के बाद सिरोही राज्य राजस्थान में जनवरी, 1950 में मिला दिया गया ।

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