राजस्थान में ऊर्जा संसाधन

Rajasthan ke Urja Sansadhan

 

Rajasthan ke urja sansadhan
Rajasthan ke urja sansadhan

राजस्थान ऊर्जा संसाधन

भारत में विद्युत का विकास 19वीं सदी के अंत में शुरू हुआ । देश का पहला जल विद्युत गृह 1897 में दार्जिलिंग में स्थापित किया गया । 1902 में कर्नाटक में शिव समुद्रम् में पन बिजली केंद्र स्थापित किया गया । स्वतंत्रता के बाद विद्युत उत्पादन एवं आपूर्ति को नियमित करने हेतु बिजली आपूर्ति अधिनियम, 1948 पारित किया गया । संविधान में विद्युत को समवर्ती सूची में स्थान दिया गया है ।

राजस्थान निर्माण के समय राज्य में 15 छोटे विद्युत गृह थे जिनकी कुल विद्युत क्षमता 13.27 मेगावाट थी ।

1 जुलाई 1957 को राजस्थान राज्य विद्युत मंडल की स्थापना की गई ।

27 जनवरी 2016 को छत्तीसगढ़ और झारखंड के बाद राजस्थान भी बिजली बोर्डों को घाटे से उबारने की केंद्र की उज्जवल डिस्काम इंश्योरेंस योजना (उदय) में शामिल हो गया है ।

राज्य में राजस्थान विद्युत क्षेत्र सुधार अधिनियम, 1999 को 1 जून 2000 से लागू किया गया तथा इस अधिनियम के तहत 19 जुलाई 2000 को अधिसूचना द्वारा राजस्थान राज्य विद्युत मंडल का विभाजन कर उसके कार्य को निम्नलिखित नवगठित पांच कंपनियों को हस्तांतरित कर दिया गया –

(1) राजस्थान राज्य विद्युत निगम उत्पादन लिमिटेड (RVUNL)
🔸मुख्यालय – जयपुर
🔸कार्यक्षेत्र – राज्य में विद्युत उत्पादन के लिए उत्तरदायी ।

(2) राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड ( RVPNL)
🔸मुख्यालय – जयपुर
🔸कार्यक्षेत्र – यह राज्य में विद्युत ग्रिड स्टेशन, विद्युत लाइनों एवं प्रसारण तंत्र के संधारण व संचालन का कार्य करता है ।

(3) जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (JVVNL)
🔸मुख्यालय – जयपुर
🔸कार्यक्षेत्र – यह निगम राज्य के 12 जिलों – जयपुर, अलवर, भरतपुर, धौलपुर, दौसा, बाराँ, बूँदी, करौली, कोटा, सवाई माधोपुर, टोंक एवं झालावाड़ में विद्युत वितरण का कार्य करता है ।

(4) अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (AVVNL)
🔸मुख्यालय- अजमेर
🔸कार्यक्षेत्र – वह राज्य के 10 जिलों – झुंझुनू,सीकर नागौर (लाडनूँ के अतिरिक्त), अजमेर, भीलवाड़ा, राजसमंद, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा में विद्युत वितरण का कार्य करता है ।

(5) जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (JVVNL)
🔸मुख्यालय – जोधपुर
🔸कार्यक्षेत्र – यह निगम भी राज्य के उत्तरी एवं पश्चिमी क्षेत्र के 10 जिलों – जोधपुर, बीकानेर, हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, जैसलमेर, बाड़मेर, जालौर, पाली, सिरोही व नागौर जिले के लाडनूं पंचायत समिति में विद्युत वितरण का कार्य करता है ।

भारत सरकार द्वारा 10 जून 2003 से विद्युत अधिनियम, 2003 लागू कर दिया गया है । राज्य सरकार ने इस अधिनियम के तहत अधिसूचना द्वारा राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम को राज्य प्रसारण निकाय ( STU) घोषित किया है ।

राजस्थान में विद्युत क्षेत्र सुधार कार्यक्रम विश्व बैंक की सहायता से किया गया है ।

सुपर क्रिटिकल पॉवर स्टेशन – जिन बिजली घरों में एक इकाई में 500 मेगावाट से अधिक विद्युत उत्पादन होता है उन्हें सुपर क्रिटिकल पॉवर स्टेशन कहते हैं ।

राज्य सरकार ने सूरतगढ़ (गंगानगर), बांसवाड़ा तथा छबड़ा ( बाराँ) में सुपर क्रिटिकल पॉवर स्टेशन स्थापित करने की स्वीकृति जारी की है । बांसवाड़ा में इसका निर्माण निजी क्षेत्र के सहयोग से किया जा रहा है ।

ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में विद्युत क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई । इस योजना में विद्युत पर कुल योजना का 35.70% खर्च किया गया ।

18 जुलाई 2012 को राज्य सरकार ने नई पवन ऊर्जा नीति 2012 जारी की है ।

सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए 19 अप्रैल 2011 को राज्य की पहली सौर ऊर्जा नीति मंजूर की गई । राजस्थान सौर ऊर्जा नीति लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है ।

राज्य में प्रथम सौर ऊर्जा पार्क ग्राम भादला (जोधपुर) में स्थापित किया जा रहा है ।

सौर ऊर्जा नीति के क्रियान्वयन के लिए राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगा ।

ऊर्जा के स्रोत :-

ऊर्जा प्राप्ति के स्रोतों को दो श्रेणियों में बांटा गया है ।

(1) परम्परागत ऊर्जा स्रोत

(क) जल विद्युत
(ख) तापीय विद्युत ( कोयला, गैस, तेल आदि )
(ग) आणविक ऊर्जा

(2) गैर परम्परागत ऊर्जा स्रोत

(क) सौर ऊर्जा
(ख) पवन ऊर्जा
(ग) बायोगैस
(घ) बायोमास
(ड़) ज्वारीय तंरग ऊर्जा
(च) भू-तापीय उर्जा

राज्य में गैर परंपरागत ऊर्जा के स्रोतों के विकास हेतु वर्तमान में राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम कार्यरत है जिसका गठन 9 अगस्त 2002 को राजस्थान ऊर्जा विकास अभिकरण एवं राजस्थान स्टेट पॉवर कॉरपोरेशन लिमिटेड को मिलाकर किया गया था । जिसका मुख्यालय जयपुर में है ।

परम्परागत ऊर्जा स्रोत

वे ऊर्जा स्रोत जिनके भंडार सीमित हैं तथा जिनका उपयोग होने के पश्चात पुन: नवीनीकरण नहीं किया जा सकता , इनमें निम्न शामिल है –

राजस्थान की ताप विद्युत परियोजनाएँ

(1) सूरतगढ़ सुपर थर्मल पॉवर स्टेशन ( SSTPS)

➡ सूरतगढ़ (गंगानगर) के निकट ठुकराणा गांव के समीप प्रभात नगर में स्थित ।
➡ राज्य का पहला सुपर थर्मल पॉवर प्रोजेक्ट ।
➡ स्थापित क्षमता- 1500 मेगावाट (6×250)
➡ 250 मेगावाट की छठी इकाई का शिलान्यास 9 जनवरी, 2007 को किया । 31-3-2009 को इसे सिंक्रोनाइज किया जा चुका है ।

(2) कोटा सुपर थर्मल विद्युत परियोजना

➡ कोटा शहर में चंबल नदी के बाये किनारे पर कोटा बैराज के निकट स्थापित ।
➡ ये राज्य का दूसरा सुपर थर्मल पॉवर प्रोजेक्ट ।
➡ कोटा बैराज पर 1240 मेगावाट (7 इकाईयाँ) का ताप विद्युत गृह स्थापित ।

(3) छबड़ा थर्मल पॉवर प्रोजेक्ट

➡ग्राम चौकी- मोतीपुरा , छबड़ा ( बाराँ) स्थित ।
➡ ये राज्य का तीसरा सुपर थर्मल पॉवर स्टेशन ।

(4) गिरल ताप विद्युत परियोजना

➡ थुम्बली गाँव, शिव (बाड़मेर ) में स्थित ।
➡ राज्य का पहला लिग्नाइट गैसीकरण तकनीक पर आधारित विद्युत गृह ।
➡ KLF जर्मनी के सहयोग से क्रियान्वयन ।

(5) गुढ़ा (बीकानेर )

➡ आंध्रप्रदेश की मरुधरा कंपनी द्वारा क्रियान्वित ।
➡ क्षमता- 125 मेगावाट ।
➡ निजी क्षेत्र की राज्य की पहली लिग्नाइट आधारित विद्युत परियोजना ।

(6) बरसिंगसर थर्मल पॉवर प्रोजेक्ट (बीकानेर )

➡ नैवेली लिग्नाइट कॉरपोरेशन द्वारा बीकानेर में क्रियान्वित ।

(7) भादेसर (बाड़मेर) लिग्नाइट आधारित सुपर पॉवर प्रोजेक्ट

(8) हाडला परियोजना ( बीकानेर )

➡ 125 मेगावाट का लिग्नाइट आधारित ताप विद्युत गृह ।

(9) कपूरड़ी-जालिपा (बाड़मेर) लिग्नाइट तापीय विद्युत परियोजना

➡ क्षमता- 1000 मेगावाट
➡ मैसर्स वेस्ट पॉवर , जयपुर द्वारा स्थापित ।

(10) कालीसिंध तापीय विद्युत परियोजना (झालावाड़ )

(11) कवई ( बाराँ) सुपर थर्मल बिजलीघर परियोजना

(12) बाँसवाड़ा सुपर क्रिटिकल थर्मल पॉवर परियोजना

राजस्थान की गैस व तरल ईधन आधारित परियोजनाएँ

(1) रामगढ़ गैस विद्युत परियोजना (जैसलमेर )

➡ राज्य द्वारा संचालित प्रथम गैस आधारित विद्युत परियोजना ।
➡ स्थापित क्षमता – 113.5 मेगावाट
➡ इस परियोजना को गैस आपूर्ति गैस अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया लिमिटेड (GAIL) द्वारा की जाएगी ।

(2) धौलपुर कम्बाइंड साइकिल गैस आधारित परियोजना

➡ कुल क्षमता : 330 (110×3)

(3) झामरकोटडा (उदयपुर )

(4) अंता गैस विद्युत परियोजना (बाराँ)

➡ NTPC द्वारा संचालित ।
➡ राजस्थान में स्थापित प्रथम गैस विद्युत परियोजना ।

राजस्थान की आणविक (परमाणु) विद्युत परियोजनाएँ

(1) राजस्थान परमाणु शक्ति गृह ( RAPP)

रावतभाटा में स्थित देश का दूसरा (तारापूरा के बाद ) तथा राज्य का पहला परमाणु बिजलीघर है । दाबित भारी पानी किस्म के रिएक्टर की श्रृंखला में यह देश का प्रथम बिजलीघर है । इसकी स्थापना कनाड़ा के सहयोग से रावतभाटा (चित्तौड़गढ़) में 1965 में की गई ।

केंद्र सरकार ने अक्टूबर, 2009 में इस परमाणु बिजलीघर की सातवीं एवं आठवीं इकाई को वित्तीय स्वीकृति प्रदान की । इन इकाइयों के शुरू होने के पश्चात् रावतभाटा परमाणु बिजलीघर साइट एशिया की सबसे बड़ी साइट व देश का न्यूक्लियर पार्क बन गया है ।

रावतभाटा में देश में पहली बार बोरॉन कार्बाइड को परिष्कृत करने का कार्य शुरू होगा । रावतभाटा स्थित केंद्र सरकार के उपक्रम भारी पानी संयंत्र से अमेरिका को भारी पानी निर्यात किया गया है ।

(2) नापला परमाणु बिजलीघर

अक्टूबर, 2010 में केंद्रीय परमाणु ऊर्जा विभाग ने बांसवाड़ा जिले के नापला में परमाणु बिजलीघर लगाने को मंजूरी प्रदान की है ।

राजस्थान की जल विद्युत परियोजनाएँ

(1) भाखड़ा नाँगल जल विद्युत परियोजना

यह परियोजना राजस्थान, हरियाणा और पंजाब की संयुक्त परियोजना है । इसमें राजस्थान का हिस्सा 15.22℅ है । यह सतलज नदी पर बना हुआ है ।

(2) रावि व्यास परियोजना

यह राजस्थान, हरियाणा व पंजाब की संयुक्त परियोजना है । यह हिमाचल प्रदेश में व्यास नदी पर बना हुआ है ।

(3) माही परियोजना

यह राजस्थान और गुजरात की संयुक्त योजना है । यह बांसवाड़ा में माही नदी पर बना हुआ है ।

(4) चम्बल परियोजना

ये मध्यप्रदेश व राजस्थान की संयुक्त परियोजना है । दोनों राज्य की 50%-50℅ हिस्सेदारी है ।

(5) जाखम बांध लघु पनबिजली परियोजना – जाखम बांध (चित्तौड़गढ़ )

(6) टिहरी जल विद्युत परियोजना

यह राजस्थान, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की संयुक्त परियोजना है । यह भागीरथी नदी (उत्तराखंड) में बना हुआ है । यह रूस के तकनीकी सहयोग से निर्मित है ।

गैर परम्परागत ऊर्जा स्रोत

वे ऊर्जा स्रोत जिनके भंडार असीमित है तथा जिनका उपयोग होने के पश्चात् प्राकृतिक रूप से पुन: नवीनीकरण हो जाता है । इनमें निम्न शामिल है – पवन ऊर्जा , बायोगैस ( जानवरों के मल मूत्र के अपघटन से प्राप्त ऊर्जा), बायोमास ( कचरा, सरसों, चावल की भूसी, खाद व पेड़ पौधों के अवशिष्ट से प्राप्त उर्जा ), बायोफ्यूल ( रतनजोत व अन्य समकक्ष तेलीय पौधो से उत्पादन ), सौर ऊर्जा , भूतापीय ऊर्जा , ज्वारीय ऊर्जा ।

राजस्थान की पवन ऊर्जा परियोजनाएँ

पवन ऊर्जा के क्षेत्र में भारत विश्व में जर्मनी, अमेरिका व स्पेन के बाद चौथे स्थान पर है तथा राजस्थान भी कर्नाटक, गुजरात, आंध्र प्रदेश व तमिलनाडु के पश्चात् देश में पांचवें स्थान पर है । राज्य में सर्वाधिक पवन ऊर्जा जैसलमेर जिले में उत्पादित होती है ।

(1) अमर सागर (जैसलमेर )

➡ 1999 में स्थापित राजस्थान का प्रथम पवन ऊर्जा संयंत्र ।

(2) विंड एनर्जी प्लांट (जैसलमेर )

➡ जुलाई 2011 में स्थापित ।
➡ S9X टेक्नोलॉजी का देश में अपनी तरह का यह प्रथम प्लांट है, जो हवा की गतिज ऊर्जा को अधिकतम संग्रहित कर के विद्युत उत्पादन करता है ।

(3) तेजुवा (जैसलमेर )

26 जुलाई 2011 को यहाँ सुजलॉन कंपनी के विंड टरबाइन का लोकार्पण किया गया ।

(4) बड़ा बाग (जैसलमेर )

➡ यहाँ राज्य की निजी क्षेत्र की प्रथम पवन ऊर्जा परियोजना मैसर्स कालानी इंडस्ट्रीज, इंदौर द्वारा स्थापित की गई ।

(5) फतेहगढ़ (जैसलमेर )

➡ 31 दिसंबर 2015 को प्रारंभ ।

(6) विंडमिल पॉवर प्लांट (जैसलमेर )

➡ जनवरी 2016 में प्रारंभ ।

(7) हन्सुआ (जैसलमेर )
(8) सोढ़ा बाँधन ( जैसलमेर )
(9) देवगढ़ (चित्तौड़गढ़ )
(10) हर्ष पर्वत (सीकर )
(11) बीठड़ी फलौदी (जोधपुर )

राजस्थान की बायोमास ऊर्जा आधारित परियोजनाएँ

बायोमास दहन पर आधारित बिजली संयंत्रों में पदार्थ के रूप में चावल की भूसी, गन्ने की सीठी,कपास के डण्ठलों, सरसों खल आदि का प्रयोग किया जाता है । ग्रामीण क्षेत्रों में परिवारिक कार्यों के लिए बनाए जाने वाले गैस संयंत्र दो प्रकार के मॉडलों पर आधारित हैं – (१) KBIC मॉडल (२) जनता मॉडल ( दीनबंधु मॉडल)

(1) पदमपुर कल्पतरू पॉवर ट्रांसमिशन लिमिटेड ( श्रीगंगानगर )

➡ राज्य का प्रथम विद्युत संयंत्र ( 7 मेगा वाट )
➡ नीदरलैंड की कंपनी सेन्टरनोवेम के सहयोग से ।

(2) खतौली (उणियारा, टोंक ) – 8 मेगा वाट
(3) रंगपुर सूर्या चंबल पावर लिमिटेड (कोटा )
(4) कोटपूतली अमृत एनवायरनमेंट ( जयपुर )
(5) चंदेरिया बिरला कॉरपोरेशन लिमिटेड ( चित्तौड़गढ़ )
(6) पचार (छिंपा बड़ौदा ) बाराँ एम एम एनवायरमेंटल टेक्नोलॉजी प्रा. लि.
(7) संगरिया (हनुमानगढ़) संजोग शुगर एंड इको पावर प्रा. लि.
(8) रामपुर (सिरोही) संभव एनर्जी लिमिटेड
(9) कचेला- बांगसरी सांचौर (जालौर) ट्रांसटेक ग्रीन पावर लिमिटेड
(10) पूंजियावास मेड़ता (नागौर) सत्यम पावर लिमिटेड
(11) चांदली- देवली (टोंक )
(12) कछेला-बागसरी ( सांचौर )
(13) रान्दीलिया-मालपुरा (टोंक )
(14) खारची-मारवाड़ (पाली )
(15) भंवरगढ़- किशनगंज (बाराँ)
(16) एम.आई.ए ( अलवर )

राजस्थान की सौर ऊर्जा पर आधारित परियोजनाएँ

सौर ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में राजस्थान ने पहला स्थान प्राप्त किया है । यहाँ सर्वाधिक 1304.10 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन हुआ है ।

13 अप्रैल 2011 को सौर ऊर्जा के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सौर ऊर्जा नीति को मंजूरी दी है । राजस्थान देश का पहला राज्य बन गया है जहां सौर ऊर्जा नीति को मंजूरी दी गई है ।

सोलर रूफटॉप पावर जेनरेशन स्कीम – रूफटॉप पर सौर ऊर्जा द्वारा उत्पादन को बढ़ावा देने हेतु विनियामक आयोग द्वारा 26 फरवरी 2015 को शुद्ध परिमाण विनियामक जारी कर दिया गया है । नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जनवरी 2016 में राजस्थान में 25 मेगावाट पी.वी क्षमता के रूफ टॉप प्रोजेक्ट्स की स्वीकृति दी गई है ।

सौभाग्य योजना – भारत सरकार द्वारा शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के सभी इच्छुक परिवारों को विद्युत उपलब्ध कराने हेतु प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर “सौभाग्य योजना” का 25 सितंबर, 2017 को शुभारंभ किया गया ।

राज्य सरकार द्वारा सौभाग्य योजना में शामिल होकर शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के क्रियान्वयन से वंचित परिवारों को विद्युत उपलब्ध कराने हेतु योजना है ।

SEEZ ( Solar Energy Enterprising Zone) – जहां सौर ऊर्जा के पश्चात् के सभी परिस्थितियां अनुकूल हो वह क्षेत्र सह क्षेत्र सीज कहलाता है । राजस्थान में जोधपुर, जैसलमेर और बाड़मेर को मिलाकर ‘सीज’ की संज्ञा दी गई है ।

सोलर सिटी कार्यक्रम – नवीन व नवीनीकरण ऊर्जा स्रोत मंत्रालय के ‘सोलर सिटी’ कार्यक्रम के अंतर्गत जयपुर, जोधपुर व अजमेर को सोलर सिटी घोषित किया गया है ।

जवहारलाल नेहरू सोलर मिशन :- भारत सरकार ने जवाहरलाल नेहरू सोलर मिशन 19 नवंबर 2009 को अनुमोदित किया ,जिसे 11 जनवरी 2010 को शुरू किया गया है ।

(1) मथानिया सौर ऊर्जा परियोजना ( जोधपुर )

मथानिया स्थान पर देश की प्रथम सौर ऊर्जा परियोजना राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम द्वारा स्थापित किया गया । इसकी क्षमता 140 मेगावाट है ।

(2) भड़ला ( जोधपुर )

21 अगस्त 2013 को जोधपुर के बाप क्षेत्र के भड़ला में (220 केवी जीएसएस ) दुनिया के सबसे बड़े सोलर पार्क का शिलान्यास किया गया ।

(3) धूड़सर (जैसलमेर )

31 मार्च, 2012 से 40 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र ने यहाँ कार्य करना प्रारंभ कर दिया ( अनिल अंबानी समूह की कंपनी रिलायंस पॉवर द्वारा ) । यह देश की अब तक की सबसे बड़ी सौर बिजली परियोजना है ।

🔸देश का प्रथम 100 KW क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र – गौरीर गांव (झुंझुनू )

🔸राज्य का प्रथम सौर ऊर्जा विद्युतकृत गांव – नया गाँव ( जयपुर )

🔸देश का प्रथम सौर ऊर्जा फ्रिज – बालेसर (जोधपुर )

🔸भारत का पहला सोलर थर्मल पावर स्टेशन – नोख (जैसलमेर )

🔸राज्य का पहला सौर ऊर्जा चलित एटीएम – मनोहरपुर (जयपुर )

🔸ऊर्जाकृत कुओं की सर्वाधिक संख्या वाला जिला – जयपुर

🔸राज्य का पहला बायो CNG प्लांट – दुर्गापुरा (जयपुर )

🔸न्यूक्लियर रेडियो एक्टिव प्रोटेक्शन केंद्र – जयपुर

🔸भरूखेड़ा (बीकानेर) में एशिया का प्रथम सोलर थर्मल पावर स्टेशन स्थापित किया जाएगा ।

🔸हिम्मतासर (बीकानेर ) में राज्य का प्रथम हाईटेक (पूर्णता कंप्यूटराइज्ड ) 400 किलोवाट ग्रिड सबस्टेशन खुलेगा ।

🔸नानी गांव (सीकर ) में RUIDP द्वारा ऐसा संयंत्र स्थापित होने जा रहा है जो कचरे से बिजली पैदा करेगा ।

🔸भालेरी (चुरु ) में सौर ऊर्जा से खारे पानी को मीठा बनाने के लिए यहां संयंत्र लगाया गया है ।

🔸सितंबर ,1997 में पिछोला झील (उदयपुर) में विश्व की पहली सौर ऊर्जा से चलने वाली नाव चलाई गई ।

🔸हनुमानगढ़ जिले में नहर पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाया जा रहा है ।

महत्वपूर्ण बिंदु :-

🔸राज्य का प्रथम तेल कुआँ- तनोट (जैसलमेर )

🔸लिग्नाइट आधारित प्रथम विद्युत गृह – गिरल गांव (बाड़मेर )

🔸सर्वाधिक बायोगैस संयंत्र- उदयपुर

🔸राजस्थान ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार 14 दिसंबर को प्रदान करता है ।

🔸राजस्थान विंड एंड हाइब्रिड एनर्जी पॉलिसी 18 दिसंबर 2019 को जारी की गई ।

🔸मुख्यमंत्री ग्रामीण घरेलू कनेक्शन योजना अक्टूबर 2016 में शुरू की गई ।

🔸सोलर स्किल डेवलपमेंट सेंटर भड़ला (जोधपुर) में प्रस्तावित ।

🔸सौर ऊर्जा चालित हवाई अड्डा – जयपुर

🔸बाड़मेर का मंगला ऑयल फील्ड भारत का सबसे बड़ा तटवर्ती हाइड्रोकार्बन क्षेत्र हैं ।

🔸जयपुर में राज्य का पहला गैस इन्सुलेटेड सब स्टेशन बनाया जा रहा है ।

🔸जयपुर में न्यूक्लियर रेडियो एक्टिव प्रोटेक्शन केंद्र स्थित है ।

🔸हिम्मतासर (बीकानेर) में राज्य का प्रथम हाईटेक (पूर्णता कंप्यूटराइज्ड) 400 किलोवाट ग्रिड सब स्टेशन खुलेगा ।

🔸दानपुर सुपर थर्मल पावर परियोजना बांसवाड़ा में स्थित है ।

🔸राजस्थान में हिलियम गैस घोटारू (जैसलमेर) में मिली है ।

🔸नीमराना में हैवल्सल के वाटर हीटर प्लांट स्थित है।

🔸राजस्थान बजट 2020-21 में अक्षय ऊर्जा के विकास हेतु राजस्थान सौर ऊर्जा नीति 2019 एवं राजस्थान पवन एवं हाइब्रिड ऊर्जा नीति 2019 जारी की गई है ।

🔸राजस्थान बजट 2021-22 में राज्य में ऊर्जा क्षेत्र के समग्र विकास हेतु 30 वर्षों के लिए पर्याप्त ऊर्जा उपलब्ध के उद्देश्य से ऊर्जा नीति: 2021- 2050 जारी की जाएगी ।

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