राजस्थान के वन्य जीव अभयारण्य

Rajasthan ke Vanya jeev Abhyaran

राजस्थान के राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्य जीव अभयारण्य

राजस्थान में 1951 में वन्य जीव एवं संरक्षण अधिनियम इस दिशा में पहला प्रभावशाली कदम था । सन् 1972 में भारतीय वन्य जीव संरक्षण एक्ट तथा 1986 में पर्यावरण संरक्षण एक्ट द्वारा वन्यजीवों की रक्षा हेतु कानून बनाए गए हैं ।

राजस्थान में वर्तमान में 3 बाघ परियोजनाएँ, 3 राष्ट्रीय उद्यान ,26 वन्यजीव अभयारण्य व 33 आखेट निषिद्ध क्षेत्र , 7 मृग वन, 5 जंतुआलय और 11 कंजर्वेशन रिजर्व हैं ।

▪️राजस्थान पर्यावरण नीति बनाने वाला देश का पहला राज्य है ।

▪️बाघ संरक्षण प्रशिक्षण केंद्र शाहपुरा (जयपुर) में है ।

rajasthan ke vanya jeev abhyaran
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राजस्थान की 3 बाघ परियोजनाएँ –

1. रणथम्भौर अभयारण्य (सवाई माधोपुर )
2.सरिस्का अभयारण्य (अलवर )
3. मुकुन्दरा हिल्स (कोटा)

राजस्थान के राष्ट्रीय पार्क (उद्यान ) – Rajasthan ke National Park

 

1. रणथम्भौर राष्ट्रीय पार्क (सवाई माधोपुर )

▪️ यह राज्य का प्रथम राष्ट्रीय उद्यान है ।

▪️इसको “लैंड ऑफ टाइगर” (Land of Tiger) भी कहा जाता है ।

▪️इस अभयारण्य को राजीव गांधी राष्ट्रीय उद्यान भी कहा जाता है

▪️यह उद्यान 392 वर्ग किमी में फैला हुआ है ।

▪️रणथम्भौर अभयारण्य को 1955 में अभयारण्य का दर्जा मिला तथा 1 नवंबर 1980 को राजस्थान के प्रथम राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा मिला ।

▪️यह भारत की सबसे छोटी बाघ परियोजना है तथा भारतीय बाघों का घर कहलाता है ।

▪️सन् 1974 में विश्व वन्यजीव कोष द्वारा चलाए गए “प्रोजेक्ट टाइगर” योजना में सम्मिलित किया गया ।

▪️इस अभयारण्य में धोंक वन पाए जाते हैं ।

▪️इस अभयारण्य में गणेश जी का त्रिनेत्र मंदिर स्थित है ।

▪️यहाँ रेंटेड तीतर व दुर्लभ काला गरूड़ पाये जाते हैं।

▪️इस अभयारण्य में जोगी महल स्थित है । यहाँ क्षेत्रीय प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय खोला गया है ।

▪️2005 में भारत के प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने इस राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा की थी ।

👉 मछली (T-16) बाघिन

▪️18 अगस्त 2016 को रणथम्भौर की बाघिन मछली की पार्क के आमा घाटी एरिया में मृत्यु हो गई ।

▪️यह भारत की सबसे उम्रदराज बाघिन थी ।

▪️इसे बीबीसी(BBC) की ओर से लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया था ।

▪️मछली एकमात्र बाघिन थी जो गार्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित की गई ।

▪️अन्य नाम –
(१) रणथंबोर की रानी
(२) झील की रानी
(३) मदर ऑफ टाइगर्स
(४) क्रोकोडाइल किलर
(५) आमाघाटी के बाघों की अम्मा

2. केवलादेव राष्ट्रीय पार्क /घना पक्षी विहार (भरतपुर)

 

▪️यह एशिया में पक्षियों का सबसे बड़ा प्रजनन क्षेत्र है ।

▪️इसका क्षेत्रफल 29 वर्ग किलोमीटर है जिसमें 11 वर्ग किलोमीटर में झील है ।

▪️सन् 1956 में इसे अभयारण्य का दर्जा मिला तथा 1981 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया ।

▪️यूनेस्को से 1985 में विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त करने वाला यह राज्य का एकमात्र अभयारण्य है ।

▪️यह भारत के “गोल्डन ट्रायंगल” दिल्ली- जयपुर- आगरा (सुनहरा त्रिकोण) के बीच पड़ता है ।

▪️गंभीरी और बाणगंगा नदियाँ इस अभयारण्य से होकर गुजरती है ।

▪️इस अभयारण्य में लगभग 71 प्रजातियां की तितलियाँ पाई जाती है ।

▪️यहाँ लगभग 400 प्रकार के देशी- विदेशी पक्षी पाए जाते हैं । इनमें साइबेरियन सारस, लॉर्ज हॉक प्रमुख है ।

▪️यह अभयारण्य पक्षियों का स्वर्ग माना जाता है ।

▪️केवलादेव राष्ट्रीय पार्क में पानी की समस्या दूर करने हेतु गोवर्धन ड्रेनेज प्रोजेक्ट शुरू किया गया है ।

▪️भारत के प्रसिद्ध पक्षी विज्ञानी डॉ सलीम अली ने इसी अभयारण्य में रहकर पक्षियों की प्रजातियों पर “स्पीशीज” पुस्तक की रचना की ।

▪️इसका मुख्य आकर्षण साइबेरियन सारस है तथा दूसरा प्रमुख आकर्षण पाइथन पॉइंट है ।

3. मुकुंदरा (दर्रा) हिल्स राष्ट्रीय उद्यान (कोटा )

 

▪️9 जनवरी 2012 को इसे राष्ट्रीय पार्क का दर्जा देने की अधिसूचना जारी की ।

▪️यह राजस्थान की तीसरी बाघ परियोजना है ।

▪️वर्ष 1955 में इसे वन्य जीव संरक्षण स्थल घोषित किया गया है ।

▪️यहाँ कोटा नरेश राव मुकुंद सिंह द्वारा स्थापित अबला मिणी महल है ।

▪️मुकुंदरा की पहाड़ियों में स्थित यह सघन वन युक्त हैं । वन्यजीवों को पास से देखने के लिए रामसागर, बोड़ा, तलाई, झामरा, अमझार आदि स्थल है ,जिसे “औदिया” कहा जाता है ।

▪️इसमें चंबल ,कालीसिंध ,आहू ,आमझर नदियाँ बहती है ।

▪️मुकुंदरा हिल्स पार्क में गागरोनी तोता पाया जाता हैं । उपनाम – हीरामन तोता , हिंदुओं का आकाश लोचन , एलेक्जेन्ड्रिया पेराकीट

राजस्थान में स्थित वन्य जीव अभ्यारण ( rajasthan ke vanya jeev abhyaran)

 

1. सरिस्का अभयारण्य (अलवर )

▪️यह राजस्थान का दूसरा बाघ परियोजना क्षेत्र है ।

▪️राजस्थान सरकार द्वारा 1955 में से वन्यजीव अभयारण्य की सूची में सम्मिलित किया गया ।

▪️1978 में इसे “टाइगर प्रोजेक्ट” में सम्मिलित किया गया ।

▪️यहाँ विश्व में टाइगर स्थानांतरण का पहला सफल प्रयोग किया गया ।

▪️यह हरे कबूतरों के लिए प्रसिद्ध है ।

▪️इस अभयारण्य में कासका एवं कांकनवाड़ी के पठार स्थित है ।

▪️मयूरों का घनत्व सबसे अधिक है ।

▪️यहां कैलाश सांखला इंटरप्रिटेशन सेंटर है ।

▪️इस अभयारण्य में 4 मंदिर स्थित है – पांडुपोल हनुमानजी ,नीलकंठ महादेव, भर्तृहरि, तालवृक्ष

▪️इसमें सरिस्का पैलेस होटल महाराज जयसिंह द्वारा बनवाई गई है । इसके अतिरिक्त यहां निगम के द्वारा पर्यटकों के लिए होटल “टाइगर डेन” बनाया गया है ।

▪️1947 में महाराजा सवाई तेजसिंह फॉरेस्ट सेटलमेंट तैयार करवाई गई, जिसे “पीली किताब” कहा जाता है ।

▪️इस क्षेत्र में सीलिसेड झील स्थित है ।

2. सरिस्का (अ) अभयारण्य (अलवर )

▪️यह राजस्थान का सबसे छोटा अभयारण्य है ।

▪️इसका क्षेत्रफल 3.01 वर्ग किलोमीटर है ।

3. मरू राष्ट्रीय उद्यान (जैसलमेर )

▪️यह क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान का सबसे बड़ा अभयारण्य है ।

▪️यह 3162 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विस्तृत है, जिसमें 1900 वर्ग किलोमीटर जैसलमेर तथा 1262 वर्ग किलोमीटर बाड़मेर में है ।

▪️8 मई 1981 को इस उद्यान की स्थापना की गई ।

▪️इस अभयारण्य में सर्वाधिक संख्या में गोडावन पाए जाते हैं । यहाँ राज्य पशु चिंकारा को संरक्षण प्रदान किया गया है ।

▪️इसमें आकल वुड फॉसिल पार्क स्थित है जो प्राचीन जीवाश्मों की संरक्षण स्थली है । उद्यान में 25 वुड फॉसिल्स विद्यमान है ।

 

4. सीतामाता अभयारण्य (प्रतापगढ़ )

▪️इसे 1979 में राज्य सरकार ने अभयारण्य घोषित किया था ।

▪️सागवान वन राजस्थान में एकमात्र इसी अभयारण्य में पाये जाते हैं ।

▪️यह अभयारण्य राजस्थान का सर्वाधिक जैव विविधता वाला अभयारण्य है ।

▪️सीतामाता अभयारण्य करमोई ( कर्म मोचिनी ) नदी का उद्गम स्थल है । इसके अलावा जाखम, सीतामाता, टांकिया, भूदो, नालेश्वर नदियाँ बहती है ।

▪️इस अभयारण्य में जाखम बाँध स्थित है ।

▪️लव- कुश इस अभयारण्य में स्थित दो सदाबहार जल स्रोत हैं ।

▪️इस अभयारण्य में उड़न गिलहरीयाँ पाई जाती है । इसे रेड फ्लाइंग स्क्विरल पेटोरिस्टा एल्बीवेंटरआशोवा नाम से भी जाना जाता है ।

▪️पेंगोलिन इस अभयारण्य में पाए जाने वाला जंतु है ।

▪️यह विश्व में एंटीलोप प्रजाति के दुर्लभतम वन्य जीव चौसिंगा हिरण(भेड़ल) के सर्वोत्तम आश्रय स्थलों में से एक है ।

 

5. सवाई मानसिंह वन्य जीव अभ्यारण (सवाई माधोपुर )

▪️रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान से लगा हुआ वन क्षेत्र है ।

▪️यह 103 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है ।

 

6. कनक सागर वन्यजीव अभयारण्य (दुगारी बूँदी)

▪️इसे 1987 में अभयारण्य घोषित किया गया था ।

▪️यह अभयारण्य पक्षियों की शरणस्थली माना जाता है ।

 

7. रामगढ़ विषधारी अभयारण्य (बूँदी )

▪️राज्य सरकार ने इसे 1982 में अभयारण्य घोषित किया गया था ।

▪️यह अभयारण्य मुख्य रूप से बाघों के लिए प्रसिद्ध हैं । रणथंबोर के बाघों का “जच्चा घर” कहलाता है ।

▪️यहाँ धोकड़ा मुख्य वृक्ष प्रजाति पायी जाती है ।

▪️बाघ परियोजना क्षेत्रों के अतिरिक्त यह राजस्थान राज्य का एकमात्र ऐसा अभयारण्य है, जहाँ राष्ट्रीय पशु बाघ स्वतंत्र विचरण करते हैं ।

▪️यहाँ काफी संख्या में अजगर भी पाए जाते हैं ।

 

8. गजनेर अभयारण्य (बीकानेर )

▪️यह मरुस्थलीय क्षेत्र का सबसे महत्वपूर्ण अभयारण्य है ।

▪️इस अभयारण्य में विश्व प्रसिद्ध “बटबर्ड” पक्षी पाया जाता है , जिसे रेत का तीतर भी कहा जाता है ।

 

9. तालछापर अभयारण्य (सुजानगढ़, चूरू )

▪️एशिया का सबसे बड़ा कृष्ण मृग अभयारण्य है ।

▪️इस अभयारण्य में कुल 34 किस्म की घास उगती है । मोचिया घास कृष्ण मृगों की सबसे चहेती घास है ।

▪️यह काले हिरणों व प्रवासी पक्षी कुरजां की शरणस्थली है ।

▪️राज्य सरकार ने इसे 1971 में अभयारण्य घोषित किया ।

 

10. कुंभलगढ़ अभयारण्य (राजसमंद )

▪️1971 में राजस्थान सरकार ने से अभयारण्य घोषित किया था ।

▪️जंगली धूसर मुर्गोंचौसिंगा हिरण (घंटेल) हेतु प्रसिद्ध है ।

▪️रणकपुर जैन मंदिर एवं कुंभलगढ़ दुर्ग इसी अभयारण्य में स्थित है ।

▪️इसे भेड़ियों की प्रजनन स्थली भी कहा जाता है ।

 

11. रावली टॉडगढ़ अभयारण्य

▪️यह अभयारण्य अजमेर, पाली व राजसमंद जिलों में विस्तृत है ।

▪️512 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है तथा 1983 में इसे अभयारण्य घोषित किया गया था ।

▪️इस अभयारण्य का नाम इतिहासकार कर्नल टॉड के नाम पर रखा गया है ।

▪️26 जनवरी 2008 को इस अभियान को राष्ट्रीय पार्क बनाने की घोषणा की है ।

▪️इस अभयारण्य में मुख्यतः बघेरा, जरख, नीलगाय आदि जानवर पाए जाते हैं ।

 

12. जयसमंद अभयारण्य (उदयपुर )

▪️1957 में इसकी स्थापना की गई थी ।

▪️यह राज्य के दक्षिणी क्षेत्र का सबसे मनोरम अभ्यारण है ।

▪️साँभर,चितकबरे, हिरण, जंगली सूअर, तेंदुए, चीते, काला भालू यहाँ प्रमुख रूप से मिलते हैं ।

▪️यह अभयारण्य बहोरा पक्षी की आश्रय स्थली रहा है ।

▪️इसे जलचरों की बस्ती भी कहा जाता है ।

 

13. फुलवारी की नाल अभयारण्य (उदयपुर )

▪️इसे 1983 में अभयारण्य घोषित किया गया था ।

▪️यह 511 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है ।

▪️इस अभयारण्य की पहाड़ी से मांसी- वाकल नदियाँ निकलती है । सोम नदी भी निकलती है ।

▪️यह अभयारण्य महाराणा प्रताप की कर्मस्थली रहा है ।

 

14. सज्जनगढ़ अभयारण्य (उदयपुर )

▪️इसकी स्थापना 1987 में की गई ।

▪️यह 519 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है ।

▪️यहाँ राजस्थान का प्रथम जैविक उद्यान विकसित किया गया है ।

 

15. चंबल अभयारण्य (कोटा )

▪️यह अभ्यारण्य राष्ट्र का सबसे बड़ा घड़ियाल अभयारण्य है जो 280 वर्ग किलोमीटर जल क्षेत्र में फैला हुआ है ।

▪️दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में चंबल नदी पर महाराणा प्रताप सागर से यमुना नदी के बहाव तक इसका फैलाव है ।

▪️यह अभयारण्य घड़ियालों के लिए प्रसिद्ध (घड़ियालों का संसार) है ।

▪️इसमें उदबिलाव व गांगेय सूंस नामक विशिष्ट स्तनपायी जंतु पाये जाते हैं ।

 

16. जवाहरसागर अभयारण्य (कोटा )

▪️इसकी स्थापना 1975 में की गई ।

▪️जलीय अभयारण्य, घड़ियालों के प्रजनन स्थल हेतु विख्यात ।

▪️चंबल नदी क्षेत्र में 280 वर्ग किलोमीटर में फैला है ।

 

17. बस्सी अभयारण्य (चित्तौड़गढ़ )

▪️यह अभयारण्य अरावली और विंध्याचल पर्वत श्रृंखलाओं के संगम स्थल के मध्य 153 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है ।

▪️इसकी स्थापना 1988 में की गई ।

▪️ये चीतल के लिए प्रसिद्ध है ।

▪️ओरई व बामनी नदी का उद्गम स्थल

▪️ अभयारण्य मेवाड़ी राजाओं के शिकार के लिए प्रसिद्ध था ।

 

18.भैंसरोडगढ़ अभयारण्य (चित्तौड़गढ़ )

▪️चित्तौड़गढ़ जिले के पर्वतीय क्षेत्र भैंसरोडगढ़ के निकट है ।

▪️इसकी स्थापना 1983 में की गई थी ।

▪️यह अभयारण्य 229 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है ।

▪️इस अभयारण्य में चंबल व बामनी नदियों का संगम होता है ।

▪️इस अभयारण्य की मुख्य धरोहर घड़ियाल है ।

 

19. बंध बारेठा अभयारण्य (भरतपुर )

▪️इसे 1985 में अभयारण्य घोषित किया गया था ।

▪️यह 193 वर्ग किलोमीटर में फैला है ।

▪️जरखों के लिए प्रसिद्ध है ।

▪️इस अभयारण्य में ‘बारेठा’ नामक प्रसिद्ध झील है ।

▪️यह भरतपुर बयाना पक्षियों के लिए प्रसिद्ध है ।

▪️इसे परिंदों का घर भी कहा जाता है

 

20. शेरगढ़ अभयारण्य (बाराँ)

▪️इसे 1983 में अभयारण्य के रूप में मान्यता दी गई ।

▪️यह अभयारण्य 99 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है ।

▪️इसमें परवन नदी बहती है ।

▪️इसे साँपों का संरक्षण स्थल कहा जाता है ।

▪️यह अभयारण्य बाघों के लिए प्रसिद्ध था इसलिए इसका नाम शेरगढ़ पड़ा ।

 

21. कैलादेवी वन्यजीव अभयारण्य (करौली )

▪️1983 में इसे अभयारण्य घोषित किया गया था ।

▪️यह पर्वतीय सघन वन क्षेत्र में स्थित है तथा 376 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है ।

▪️यहाँ बाघ,जरख,चीता,नीलगाय, सांभर इत्यादि पाये जाते हैं ।

 

22. आबू अभयारण्य (सिरोही )

▪️यह राजस्थान का एकमात्र अभ्यारण है ,जो सर्वाधिक ऊंचाई पर है ।

▪️राज्य सरकार ने इसे 1960 में अभयारण्य घोषित किया ।

▪️यह 112 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है ।

▪️विश्व का एकमात्र ” डिकिल्पटेरा आबूएसिस” नामक पादप इसी अभयारण्य में पाया जाता है, जिसे स्थानीय भाषा में “कारा” कहा जाता है ।

▪️इसमें जंगली मुर्गे,रिछ, सूअर, सांभर, नीलगाय, खरगोश, तीतर आदि अनेक जीव मिलते हैं ।

▪️इस अभयारण्य में “यूब्लेफरिस” नामक सबसे सुंदर छिपकली पाई जाती है ।

 

23. माचिया सफारी (जोधपुर )

▪️1985 में जोधपुर में कायलाना झील के किनारे मृगवन को 600 हैक्टेयर क्षेत्रफल में विकसित किया गया ।

▪️“राजस्थान का मृगवन” कहलाने वाला देश का प्रथम राष्ट्रीय मरू वानस्पतिक उद्यान , कृष्ण मृग, और चिंकारा के लिए प्रसिद्ध ।

▪️इस पार्क में एक पुराना ऐतिहासिक माचिया दुर्ग विद्यमान है जिसके कारण इसका नाम माचिया सफारी पड़ा ।

 

24. वन विहार अभयारण्य (धौलपुर )

▪️यह रामसागर वन विहार के नाम से भी जाना जाता है ।

▪️धौलपुर के अंतिम राजा उदयभान ने यह अभयारण्य 1935- 36 में बनवाया था ।

▪️इस अभयारण्य में दुर्लभ सफेद सारस ,सांभर, चिंकारा ,चीतल अादि पाये जाते हैं ।

 

25. नाहरगढ़ वन्यजीव अभयारण्य (जयपुर )

▪️यह राजस्थान जिले के ऐतिहासिक दुर्ग अामेर, नाहरगढ़ व जयगढ़ के चारों तरफ फैला हुआ है ।

▪️इसे 1982 में अभयारण्य घोषित किया गया था ।

▪️यह 50 किलोमीटर के वन क्षेत्र में फैला हुआ है ।

▪️राजस्थान का एकमात्र जैविक पार्क है ।

▪️यहाँ अजगर, घड़ियाल ,पैंथर, पाटागोह पाए जाते हैं ।

 

26. जमुवा रामगढ़ अभयारण्य (जयपुर )

▪️इसे 1982 में अभयारण्य घोषित किया गया था ।

▪️ 360 किलोमीटर के वन क्षेत्र में फैला हुआ है ।

▪️इसमें काला हिरण, स्याहपोश, तथा प्रवासी चिड़ियाएँ पाई जाती हैं ।

आखेट निषिद्ध क्षेत्र –

वन्य जीव संरक्षण की दिशा में राजस्थान में आखेट निषिद्ध क्षेत्रों का निर्धारण भी किया गया है । वन्य जीव सुरक्षा अधिनियम 1972 की धारा 37 के अनुसार ऐसे क्षेत्रों को आखेट निषिद्ध क्षेत्र घोषित किया गया है, जिनमें रहने वाले वन्य प्राणियों की सुरक्षा और विकास किया जाये तथा इन जीवों का शिकार वर्जित है ।

राजस्थान में 26720 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में 33 आखेट निषिद्ध क्षेत्र है , जो निम्न प्रकार है –

स्थान आखेट निषिद्ध क्षेत्र
जयपुर संथाल ,महला
जोधपुर डोली, गुडा, बिश्नोई, जम्मेव, वरजी, ढेचू, लोहवट और फीट कासनी
बीकानेर जोड़वीर, वैष्णे, मुकाम, बज्जू ,दी यात्रा
अजमेर तिलोरा, सोखलिया, गंगवाना
अलवर जोहड़िया व बर्डोद
नागौर रोतू और जरोदा
जैसलमेर रामदेवरा व उज्जला
उदयपुर बाकदरा
चित्तौड़गढ़ मैनाल
कोटा सौरसन
बूँदी कनक सागर
बाड़मेर धोरीमन्ना
पाली जवाई बांध
चुरू सम्वतसर कोटसर
जालौर सांचौर
टोंक रानीपुरा
सवाई माधोपुर कंवालजी

मृगवन –

राजस्थान में वन्यजीवों के संरक्षण में एक नवीन कदम हिरण के लिए मृगवन क्षेत्र निर्धारित किए गए , जो निम्न प्रकार है –

(1) अशोक विहार मृग वन (जयपुर ) -1986

(2) माचिया सफारी पार्क (जोधपुर )- 1985

(3) चित्तौड़गढ़ मृगवन – 1969

(4) पुष्कर मृगवन – 1985

(5) संजय उद्यान मृगवन (शाहपुरा , जयपुर )- 1986

(6) सज्जनगढ़ मृगवन (उदयपुर )- 1984

(7) अमृता देवी मृगवन (खेजड़ली, जोधपुर )- 1986

जंतुआलय-

(1) जयपुर जन्तुआलय

🔸1876 में स्थापित (रामनिवास बाग में )

🔸राजस्थान का सबसे पुराना (प्रथम) जन्तुआलय

🔸 राजस्थान का सबसे बड़ा जन्तुआलय भी है ।

🔸यह मगरमच्छ एवं घड़ियालों के कृत्रिम प्रजनन केंद्र के रूप में विख्यात है ।

(2) उदयपुर जंतुआलय –

🔸1878 में गुलाब बाग में स्थापित ।

(3) बीकानेर जन्तुआलय –

🔸1922 में स्थापित किया गया ।

(4) जोधपुर जन्तुआलय –

🔸1936 में स्थापित किया गया ।

🔸गोडावन के कृत्रिम प्रजनन केंद्र के रूप में विख्यात ।

(5) कोटा जंतुआलय-

🔸1954 में स्थापित किया गया ।

🔸राजस्थान का नवीनतम जंतुआलय

पार्क एवं उद्यान

(1) जयनिवास उद्यान (जयपुर ) – इस उद्यान के मध्य जयपुर के इष्ट देवता गोविंद देव जी का मंदिर स्थित है ।

(2) जल उद्यान (जयपुर )– आमेर महलों के नीचे बना जलाशय ‘मावठा’ के मध्य ज्यामितिय पद्धति पर बना उद्यान । इसे मोहनबाड़ी (केसर क्यारी) के नाम से भी जाना जाता है ।

(3) रामनिवास उद्यान (जयपुर ) – सवाई रामसिंह द्वितीय द्वारा स्थापित । इस उद्यान में अल्बर्ट हॉल म्यूजियम स्थित है ।

(4) रामबाग (जयपुर ) – इसे केसर बड़ारण का बाग भी कहते हैं ।

(5) नाटाणी का बाग (जयपुर )– यह बाग वर्तमान में जय महल पैलेस होटल में परिवर्तित कर दिया गया है ।

(6) छात्र विलास उद्यान/ उम्मेद क्लब (कोटा )– सन् 1894 में महाराव उम्मेद सिंह ने इस उद्यान में यादघर का निर्माण करवाया था ।

(7) थीम बेस्ड पार्क (जयपुर )

(8) सर्प उद्यान (कोटा )

राजस्थान के राज्य पशु /पक्षी /वृक्ष

▪️राज्य पशु – चिंकारा (वैज्ञानिक नाम गजेला-गजेला) -1981

▪️राज्य पक्षी – गोडावण ( क्रायोटिस नाइग्रीसेप्स ) -1981

▪️राज्य वृक्ष – खेजड़ी ( प्रोसोपिस सिनेरेरिया) -1983

▪️राज्य पुष्प– रोहिड़ा ( टिकोमेला अंडूलेटा ) – 1983

▪️राज्य पशु – ऊँट (2014) डोमेस्टिक एनिमल संरक्षित श्रेणी

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महत्वपूर्ण तथ्य –

  • भारत सरकार द्वारा शाहगढ़ (जैसलमेर) स्थान को संभावित रूप से “चीता पुनर्वास योजना” के लिए चुना गया है ।
  • “ग्रीन मुनिया” नामक चिड़िया आबू पर्वत पर मिलती है ।
  • स्थानीय भाषा में ‘हलेवर’ हरियल पक्षी को कहा जाता है ।
  • गागरोनी तोते मुकुंदरा हिल्स नेशनल पार्क में पाए जाते हैं ।
  • पाली में प्रोजेक्ट पैंथर का आरंभ किया गया है ।
  • राज्य का पहला ” गदर्भ अभयारण्य “ डूंडलोद (झुंझुनू) में स्थापित हुआ है ।
  • राष्ट्रीय प्राकृतिक इतिहास संयंत्र (तापग्राम) का क्षेत्रीय केंद्र रणथंबोर के रामसिंहपुरा स्थान पर है ।
  • राजस्थान का पहला सौर्य उद्यान जोधपुर शहर में स्थापित किया जाना है ।
  • गोडावण को मालमोरड़ी भी कहते हैं । गोडावण के संरक्षण के लिए राजस्थान सरकार द्वारा ऑपरेशन बस्टर्ड तथा जीन पूल संरक्षण अभियान चलाया जा रहा है । गोडावन का भोजन तारामीरा है ।
  • सन् 1986 से राजस्थान में शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध है ।
  • संविधान संशोधन के 42 वें संशोधन में वन्य जीव को 1976 में समवर्ती सूची में सम्मिलित कर दिया गया है ।
  • 1972 में वन्य जीव संरक्षण अधिनियम बना लेकिन राजस्थान राज्य में 1973 में लागू किया गया ।
  • हीरामन जाति के तोते गागरोन (झालावाड़) में पाए जाते हैं ।
  • 1980 में जयपुर में गोडावण पर पहला अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया था ।
  • “भरतपुर बर्ड पैरेडाइज” नामक पुस्तक के लेखक सर मार्टिन इवान्स है ।
  • वन्यजीवों की संख्या की दृष्टि से राज्य का देश में दूसरा स्थान है ।
  • रणथंबोर अभ्यारण से विलुप्त बाघों के संबंध में छेड़ा गया अभियान “मिशन एंटी पोचिंग” था ।
  • ताल छापर (चूरू) और खींचण (जोधपुर) प्रवासी कुरजा पक्षियों के प्रमुख स्थल हैं ।
  • पशु- पक्षियों का वह स्थल जिसके रखरखाव का दायित्व केंद्र सरकार पर होता है राष्ट्रीय उद्यान कहलाता है ।
  • राज्य सरकार द्वारा स्थापित स्थल जिसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार पर होती है उसे अभयारण्य कहते हैं ।
  • राज्य के सबसे अधिक 11 वन्य जीव अभ्यारण्य अरावली पर्वतीय प्रदेश में है ।
  • कैलाश सांखला (जोधपुर) को टाइगर मैन ऑफ इंडिया भी कहते हैं तथा इनके द्वारा लिखी गई पुस्तक रिटर्न ऑफ द टाइगर (return of the tiger) है ।

Rajasthan ke Vanya jeev abhyaran

-QUESTION AND ANSWER 

इन्हें भी देखें – 

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