द्रव्य के सामान्य गुण तथा प्रकार । प्रत्यास्थता की परिभाषा

आज हम सामान्य विज्ञान में प्रत्यास्थता की परिभाषा (Elasticity Ki Paribhasha in Hindi) तथा प्रतिबल,विकृति के बारे में जानेंगे, जो आपके आने वाले एग्जाम SSC, RRB, Patwari, आदि में प्रश्न पूछा जाता है ।

Elasticity Ki Paribhasha in Hindi
Elasticity Ki Paribhasha in Hindi

द्रव्य ( Matter) – प्रत्येक वह वस्तु जो स्थान घेरती है, जिसमें द्रव्यमान होता है एवं जिसका अनुभव हम अपनी ज्ञानेंद्रियों के द्वारा कर सकते हैं, द्रव्य कहलाती है । उदाहरण – लकड़ी, जल, वायु आदि ।

द्रव्य की अवस्थाएं ( States of Matter)

सामान्यत: द्रव्य की तीन अवस्थाएं – ठोस (Solid), द्रव (Liquid) और गैस (Gas) मानी जाती है । परंतु द्रव्य की चौथी अवस्था भी होती है, जिसे प्लाज्मा (Plasma) कहा जाता है ।

द्रव्य के सामान्य गुण ( General Properties of Matter)

ठोस, द्रव और गैस में कुछ गुण अधिक स्पष्ट रूप में पाए जाते हैं जो इस प्रकार हैं –

🔸ठोस : प्रत्यास्थता
🔸द्रव : दाब,प्लवन, पृष्ठ तनाव, केशिकत्व,श्यानता
🔸गैस: वायुमंडलीय दाब

प्रत्यास्थता किसे कहते हैं (प्रत्यास्थता की परिभाषा )

जब किसी वस्तु पर है बाह्य बल लगाया जाता है, तो उसकी लम्बाई, आयतन तथा आकृति में कुछ परिवर्तन हो जाता है और जब यह बल हटा लिया जाता है ,तो वस्तु अपनी पूर्व स्थिति में आ जाती है । इस बाह्य बल को विरूपक बल (Deforming Force) एवं वस्तुओं के इस गुण को प्रत्यास्थता (Elasticity) कहते हैं ।

वे पदार्थ अधिक प्रत्यास्थ कहलाते हैं, जो अपनी पूर्वावस्था में आने में अधिक समय लगाते हैं । जैसे :- इस्पात, रबड़ ।

जब किसी वस्तु की आकृति अथवा आकार बदल जाता है तो वस्तु विकृत या विरूपित हो जाती है ,इस क्रिया को विरूपण कहते हैं ।

प्रत्यास्थता सीमा ( Elastic Limit) :- विरूपक बल के परिणाम की वह सीमा जिससे कम बल लगाने पर पदार्थ में प्रत्यास्थता का गुण बना रहता है तथा जिससे अधिक बल लगाने पर पदार्थ का प्रत्यास्थता का गुण समाप्त हो जाता है , प्रत्यास्थता की सीमा कहलाती है । भिन्न-भिन्न पदार्थों के लिए प्रत्यास्थता की सीमा भिन्न-भिन्न होती है ।

विकृति तथा प्रतिबल ( Strain and Stress)

किसी वस्तु पर विरूपक बल लगाने पर उसकी मूल लंबाई में वृद्धि एवं मूल लंबाई के अनुपात को विकृति कहते हैं ,अर्थात् वस्तु की प्रारंभिक लंबाई L में वृद्धि (l) होती है तो l/L को विकृति कहते हैं तथा प्रति एकांक क्षेत्रफल पर लगाए गए बल को प्रतिबल कहते हैं ।

प्रतिबल एवं विकृति के अनुपात को वस्तु की प्रत्यास्थता का यंग- मापांक (Young’s Modulus of Elasticity) कहते हैं ।

हुक का नियम ( Hooke’s Law):-

प्रत्यास्थता सीमा के अंदर किसी वस्तु में उत्पन्न विकृति ,उस पर लगाए गए प्रतिबल के अनुक्रमानुपाती होती है , अर्थात् प्रतिबल विकृति

अथवा , प्रतिबल / विकृति = E (एक नियतांक , जिसे प्रत्यास्थता गुणांक कहते हैं )

प्रत्यास्थता गुणांक E का मान भिन्न-भिन्न पदार्थों के लिए भिन्न-भिन्न होता है । यदि विकृति लंबाई में हुई है, तो प्रत्यास्थता गुणांक को यंग गुणांक कहते हैं । प्रत्यास्थता गुणांक का SI मात्रक न्यूटन / मीटर² होता है , जिसे पास्कल (Pa) कहते हैं ।

यंग गुणांक (Y) 
= अनुदैर्ध्य प्रतिबल / अनुदैर्ध्य विकृति
= MgL/ πr²l

यदि विकृति आयतन में हो, तो उसे आयतन गुणांक (B) कहते हैं । अपरूपण विकृति के लिए इसे अपरूपण गुणांक कहते हैं । आयतन गुणांक का SI मात्रक न्यूटन / मीटर² होता है , जिसे पास्कल (Pa) कहते हैं ।

नोट:- आइटम गुणांक के विलोम को संपीड्यता (Compressibility) कहते हैं ।

प्वासो अनुपात ( Poisson’s Ratio) : पार्श्विक विकृति तथा अनुदैर्ध्य विकृति के अनुपात को प्वासो अनुपात कहा जाता है । इसे प्रतीक σ से निरूपित किया जाता है ।

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