मुगल साम्राज्य का इतिहास – 3

सम्राट जहाँगीर (1605-1627 ई.)

सम्राट जहाँगीर का शासनकाल

सम्राट जहाँगीर

अकबर का उत्तराधिकारी सलीम हुआ, जो 24 अक्टूबर 1605 ई. नूरूद्दीन मुहम्मद जहाँगीर बादशाही गाजी उपाधि धारण कर गद्दी पर बैठा ।

जहांगीर का जन्म 30 अगस्त 1569 ईस्वी को हुआ । जहांगीर की मां का नाम मरियम उज्जमानी (जोधाबाई) था । अकबर सलीम को शेखो बाबा नाम से पुकारते थे ।

अकबर ने अपने पुत्र का नाम सलीम, सूफी संत शेख सलीम चिश्ती के नाम पर रखा ।

जहांगीर के गुरु अब्दुर्रहीम खानखाना थे ।

जहांगीर का विवाह राजा भगवानदास की पुत्री मानबाई से तथा मोटा राजा उदयसिंह की पुत्री जगत गोसाई से हुआ था । मानबाई को सलीम ने शाह बेगम की उपाधि दी थी ।

जहांगीर को न्याय की जंजीर के लिए याद किया जाता है । यह जंजीर सोने की बनी थी, जो आगरा के किले के शाहबुर्ज एवं यमुना तट पर स्थित पत्थर के खम्भे में लगवाई हुई थी । न्याय की जंजीर में 60 घंटियां थी ।

लोक कल्याण के उद्देश्य से संबंधित 12 आदेशों की घोषणा जहांगीर ने करवाई । जहांगीर का प्रथम आदेश तमगा नामक कर वसूली पर प्रतिबंध था । जहाँगीर का पांचवा आदेश शराब एवं अन्य मादक पदार्थों की बिक्री एवं निर्माण पर प्रतिबंध था ।

सप्ताह में गुरुवार एवं रविवार के दिन पशु हत्या पर प्रतिबंध था ।

जहांगीर द्वारा शुरू की गई तुजुक-ए-जहाँगिरी नामक आत्मकथा को पूरा करने का श्रेय मोतबिंद खाँ को है ।

जहाँगीर के सबसे बड़े पुत्र खुसरो ने 1606 ई. में अपने पिता के विरुद्ध विद्रोह कर दिया । खुसरो और जहांगीर की सेना के बीच युद्ध जालंधर के निकट भैरावल नामक मैदान में हुआ ।

खुसरो की सहायता देने के कारण जहाँगीर ने सिखों के पांचवें गुरु अर्जुन देव को फाँसी दिलवा दी ।

अहमदनगर के वजीर मलिक अम्बर के विरुद्ध सफलता से खुश होकर जहाँगीर ने खुर्रम को शाहजहाँ की उपाधि प्रदान की ।

सम्राट जहांगीर एवं राणा अमर सिंह के बीच 1615 ई. में संधि हुई ।

1622 ईस्वी में कंधार मुगलों के हाथ से निकल गया । शाह अब्बास ने इस पर अधिकार कर लिया ।

नूरजहाँ
ईरान निवासी मिर्जा गयास बेग की पुत्री नूरजहाँ का वास्तविक नाम मेहरून्निसा था । 1594 ईस्वी में नूरजहाँ का विवाह अलीकुली बेग से संपन्न हुआ । 1607 ई. में अलीकुली बेग मृत्यु के बाद में मेहरून्निसा अकबर की विधवा सलीमा बेगम की सेवा में नियुक्त हुई ।

सर्वप्रथम जहांगीर ने नवरोज त्योहार के अवसर पर मेहरून्निसा को देखा और उसके सौंदर्य पर मुग्ध होकर जहाँगीर ने मई, 1611 ई. में उससे विवाह कर लिया । विवाह के पश्चात् जहाँगीर ने उसे नूरमहल एवं नूरजहाँ की उपाधि प्रदान की ।

लाडली बेगम अलीकुली बेग (शेर अफगान ) एवं मेहरून्निसा की पुत्री थी, जिसकी शादी जहांगीर के पुत्र शहरयार के साथ हुई थी ।

नूरजहाँ की मां अस्मत बेगम ने गुलाब से इत्र निकालने की विधि खोजी थी ।

इतमाद-उद-दौला का मकबरा 1626 ईस्वी में नूरजहां बेगम ने बनवाया । मुगलकालीन वास्तुकला के अंतर्गत निर्मित यह प्रथम ऐसी इमारत है जो पूर्णरूप से बेदाग सफेद संगमरमर से निर्मित है । सर्वप्रथम इसी इमारत में पितरा बुरा नामक जड़ाऊ काम किया गया ।

जहाँगीर के मकबरे का निर्माण नूरजहाँ ने करवाया था ।

महावत खाँ ने झेलम नदी के तट पर जहाँगीर, नूरजहाँ एवं उसके भाई आसफ खाँ को बंदी बना लिया था ।

जहांगीर ने गियास बेग को शाही दीवान बनाया एवं इतमाद-उद-दौला की उपाधि दी ।

जहाँगीर के 5 पुत्र थे – खूसरो, परवेज,खुर्रम,शहरयार,जहाँदार

28 अक्टूबर, 1627 को भीमवार नामक स्थान पर जहाँगीर की मृत्यु हो गई । उसे शाहदरा (लाहौर) में रावि नदी के किनारे दफनाया गया ।

मुगल चित्रकला अपने चरमोत्कर्ष पर जहाँगीर के शासनकाल में पहुंची । जहाँगीर के समय को चित्रकला का स्वर्णकाल कहा जाता है ।

जहाँगीर के दरबार के प्रमुख चित्रकार थे – आगा रजा , अबुल हसन , मुहम्मद नासिर , मुहम्मद मुराद, उस्ताद मंसूर, विशनदास, मनोहर एवं गोवर्धन, फारुख वेग, दौलत ।

जहाँगीर ने आगा रजा के नेतृत्व में आगरा में एक चित्रणसाला की स्थापना की । कश्मीर का शालीमार बाग जहाँगीर ने लगवाया ।

उस्ताद मंसूर एवं अबुल हसन को जहाँगीर ने क्रमश: नादिर-अल-उस एवं नादिरूज्जमा की उपाधि प्रदान की । इसने संस्कृत के कवि जगन्नाथ को ‘पंडितराज’ की उपाधि दी ।

जहाँगीर के शासनकाल में कैप्टन हॉकिंस (प्रथम अंग्रेज ), सर टॉमस रो, विलियम फिंच एवं एडवर्ड टैरी जैसी यूरोपीय यात्री आए थे ।

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