विश्व का इतिहास

World History in Hindi

 मानव के विकास की कहानी आज से लगभग 2 मिलियन वर्ष पूर्व अफ्रीका से प्रारंभ हुई । वर्तमान मानव के आदि पुरूष ने लगभग 20000 शताब्दी पूर्व भोजन की खोज में अफ्रीका के सवाना क्षेत्र में प्रवेश किया ।

नियंडरथल मानव ने इस उद् विकाश की प्रक्रिया का अनुगमन किया और लगभग 40000 वर्ष पूर्व मानव शरीरिक रूप से पूर्ण आधुनिक हो गया ।

आरंभिक पश्चिमी सभ्यता का उद्भव लगभग 3200 ईसा पूर्व में मेसोपोटामिया में हुआ माना जाता है ।

लगभग 600 ईसवी पूर्व तक सभी महत्वपूर्ण सभ्यताएं अपना अस्तित्व ग्रहण कर चुकी थी । मानव की प्रगति की कहानी के उस भाग को “इतिहास” कहते हैं जिसके लिए लिखित साक्ष्य उपलब्ध हैं ।

वह लंबा सुदूर अतीत , जो मनुष्य ने घटनाओं का कोई लिखित विवरण नहीं लिखा, “प्राक् इतिहास” कहलाता है । इस समयावधि को हम बहुधा प्रागैतिहासिक काल भी कहते हैं ।

भारत की हड़प्पा संस्कृति इसी युग की पहचान है, चूंकि इसके इतिहास लिखित होते हुए भी पढ़े नहीं गए हैं ।

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पाषाण काल

पाषाण काल को तीन भागों में बांटा गया है –
(१) पूर्व पाषाण काल
(२) मध्य पाषाण काल
(३) नवपाषाण काल

पूर्व पाषाण काल ( Palaeolithic Period)

होमोसेपियन्स का उद्भव पूर्व पाषाण काल में 36000 वर्ष ईसा पूर्व प्रथम बार हुआ ।

इसका मुख्य हथियार दुस्ती कुल्हाड़ी थी । उनके हथियार पत्थर के थे तथा देखने में भद्दे तथा बिना पॉलिश युक्त थे ।

कृषि नहीं, भोज्य पदार्थ – जंगली कंदमूल, पशुओं का मांस , मछली आदि । मुख्य व्यवसाय शिकार करना था । बाद में आग जलाना भी सीख लिया ।

आरंभ में नंगे रहना, लेकिन बाद में शरीर को ढकने के लिए वृक्ष की छाल,पत्तों और पशुओं की खाल का प्रयोग करना उसने सीख लिया ।

इस काल के मानव मुख्यत: भोजन इकट्टा करने वाले माने जाते हैं ।

मध्य पाषाण काल ( Mesolithic Period )

मध्य पाषाण काल का मुख्य औजार माइक्रोलिथ (नुकीला ब्लेड) था । मध्य पाषाण काल में कृषि की शुरुआत हुई । भोजन इकट्ठा करने वाले मनुष्य से अब वह भोजन उत्पन्न करने वाला मनुष्य बन गया ।

नव पाषाण काल ( Neolithic Period)

कृषि कार्यों में सहायता के लिए मानव ने पशुओं का पालन आरंभ किया । सर्वप्रथम कुत्ता एवं गधा पाले गए । इसके बाद बकरी, भेड़, गाय, भैंस और घोड़े का पाला गया ।

मानव आवास की स्थायी व्यवस्था की गई । इस काल का अत्यंत उल्लेखनीय अविष्कार चक्र या पहिया था ।

इस काल में मानव लाल रंग के बर्तन का उपयोग करते थे । अतिरिक्त खाद्य सामग्री को इस बर्तन में संचित कर भविष्य के लिए रखते थे ।

फल,कंदमूल, सब्जियां, अनाज, जानवरों का मांस, मछली, दूध-दही, मक्खन-घी आदि नव पाषाण युग में मानव के खाद्य पदार्थ थे ।

मनुष्य ने सर्वप्रथम तांबा धातु का प्रयोग किया तथा उसके द्वारा बनाया जाने वाला प्रथम औजार कुल्हाड़ी (प्राप्ति स्थल – अतिरम्पक्कम) था ।

कृषि के लिए अपनाई गई सबसे प्राचीन फसल गैहूँ एवं जौ थी, लेकिन मानव द्वारा सर्वप्रथम प्रयुक्त अनाज चावल था ।

इनामगाँव ताम्र पाषाण युग की एक बड़ी बस्ती थी । इसका संबंध जोर्वे संस्कृति से है ।

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