मुगलकालीन चित्रकला

Mugalkalin Chitrakala in Hindi

 मुगल काल में फारसी चित्रकला का हिंदू चित्रकला पर प्रभाव पड़ा हुआ व चित्रण में बारीकियों के सनावेश से मुगल शैली का उदय हुआ ।

Mugalkalin Chitrakala in Hindi
Mugalkalin Chitrakala in Hindi

हुमायूं के काल में मुगल चित्रकला की शुरुआत “मीर सैय्यद अली” व “अब्दुल समद” ने की ।

अकबर ने चित्रकारी हेतु नया विभाग खोला । अकबर के काल में पहली बार भित्ति चित्रकारी प्रारंभ हुई थी । अकबर ने हिंदू चित्रकारों को आश्रय दिया । इनमें प्रमुख थे – दसवंत, बसावन, लाल मुकुंद, सावलदास , महेश आदि ।

हम्जनामा या दास्ताने- अमीर हम्जा मुगलकालीन प्रमुख चित्र संग्रह है जिसमें लगभग 1200 चित्रों का संग्रह है ।

अकबर के प्रमुख चित्रकार दसवंत ने “रज्जनामा” नामक एक पांडुलिपि तैयार की । खानदाने-तैमूरिया व तूतीनामा दसवंत की अन्य कृतियाँ है । अकबर ने दसवंत को अपने समय का प्रथम अग्रणी चित्रकार कहा है ।

अकबर के समय का सर्वोत्कृष्ट चित्रकार बसावन था जिसकी प्रमुख कृतियाँ ‘मंजनूँ’ को दुबले-पतले घोड़े पर निर्जन क्षेत्र में भटकता हुआ दर्शाया गया है ।

जहांगीर के काल में मुगल चित्रकला शैली अपने चरमोत्कर्ष पर पहुंच गई थी । जहांगीर के काल में हस्तलिखित ग्रंथों के स्थान पर छवि चित्रण ( व्यक्ति चित्र ) व प्राकृतिक दृश्यों के चित्रण की परंपरा की शुरुआत हुई । उसके समय के प्रमुख चित्रकार उस्ताद मंसूर, अबुल हसन, मनोहर, दौलत, फारुख शेख व बिशनदास थे ।

जहांगीर ने उस्ताद मंसूर को “नादिर उल असर ‘ व अबुल हसन को ” नादिर-उद्-जमा” की उपाधि दी । अबुल हसन ने ‘तजुके-जहाँगीर के मुखपृष्ठ पर चित्र बनाया । उस्ताद मंसूर पक्षी विशेषज्ञ चित्रकार था ।

जहांगीर की चित्रशैली में रूपवादी शैली की प्रधानता है । जहांगीर ने बिशनदास को फारस के शाह के दरबार में चित्र बनाकर लाने को भेजा ।

जहाँगीर ने अपनी आत्मकथा ‘तुजुके जहाँगीर’ में लिखा है कोई भी चित्र को मैं देखते ही यह तुरंत बता सकता हूं कि यह किस चित्रकार की कृति है ।

शाहजहाँ के समय के प्रमुख चित्रकार मीर हाशिम, हुनर मुहम्मद नादिर, अनूप , फकीर उल्ला व चित्रा थे ।

औरंगजेब के शासनकाल में चित्रकला को इस्लाम विरूद्ध बताकर बंद कर दिया गया । इस समय मुगल चित्रकार क्षेत्रीय राज्यों में चले गए व कई क्षेत्रीय शैलियों का विकास किया जिसमें राजपूती व पहाड़ी शैली ( काँगड़ा,बसौली,चम्बा व जम्मू ) प्रमुख है ।

राजपूत शैली को भारत की प्राचीन स्थानीय कला माना गया है । राजपूत और पहाड़ी शैली के चित्रों में पौराणिक विषयों का चित्रांकन अधिक हुआ है ।

Leave a Reply

error: Content is protected !!
Scroll to Top