प्लवन और प्लवन का नियम तथा सिद्धांत

आज हम सामान्य विज्ञान में प्लवन और प्लवन का नियम तथा सिद्धांत (Floatation in Hindi) तथा प्लवन के नियम,उत्प्लावन बल औक आर्कमिडीज का सिद्धांत के बारे में जानेंगे, जो आपके आने वाले एग्जाम SSC, RRB, Patwari, आदि में प्रश्न पूछा जाता है ।

प्लवन और प्लवन का नियम तथा सिद्धांत
प्लवन और प्लवन का नियम तथा सिद्धांत

प्लवन का नियम (Law of Floatation)

“संतुलित अवस्था में तैरने पर वस्तु अपने भार के बराबर द्रव विस्थापित करती है ।” इस नियम को प्लवन का नियम कहते हैं ।

अधिक घनत्व वाले द्रव में तैरने पर वस्तु का कम भाग द्रव के अंदर डूबेगा तथा कम घनत्व वालें द्रव में वस्तु का अधिक भाग डूबेगा ।

उत्प्लावन बल ( Buoyant Force)

जब कोई ठोस वस्तु द्रव में डुबोयी जाती है, तो उसके भार में कुछ कमी प्रतीत होती है । भार में यह आभासी कमी द्रव द्वारा वस्तु पर ऊपर की ओर लगाए गए बल के कारण होती है । इस बल को उत्प्लावन बल या उत्क्षेप कहते हैं ।

उत्क्षेप वस्तु द्वारा हटा गये द्रव के गुरुत्व केंद्र पर कार्य करता है , जिसे उत्प्लावन केंद्र कहते हैं ।

जल के उत्क्षेप का अध्ययन सर्वप्रथम आर्कमिडीज ने किया और एक सिद्धांत दिया जिसे “आर्कमिडीज का सिद्धांत” कहते हैं ।

आर्कमिडीज का सिद्धांत ( Archimedes’s Principal) :-

जब कोई वस्तु किसी द्रव में पुरी अथवा आंशिक रूप से डुबोई जाती हैं , तो उसकी भार में आभासी कमी होती है । भार में यह आभासी कमी वस्तु द्वारा हटाए गए द्रव के भार के बराबर होती है ।

डुबोई गई वस्तु पर ऊपर की ओर एक उत्प्लावन बल कार्य करता है जो कि विस्थापित तरल के भार के बराबर होता है ।

दैनिक जीवन में आर्कमिडीज के सिद्धांत एवं प्लवन के नियम के अनेक उदाहरण देखने को मिलते हैं । जैसे-

(१) लोहे का जहाज पानी पर तैरता है, परंतु लोहे की कील पानी में डूब जाती है ।
(२) जीवन रक्षक पेटी भी इसी सिद्धांत पर कार्य करती है ।
(३) पनडुब्बी भी सिद्धांत पर कार्य करती है ।

तैरने के नियम :- जब वस्तु किसी द्रव में तैरती है, तो उसका भार उसके द्वारा हटाए गए द्रव के भार के बराबर होता है तथा वस्तु का गुरुत्व केंद्र और हटाए गए द्रव का गुरुत्व केंद्र दोनों एक ही ऊर्ध्वाधर रेखा में होते हैं ।

जब बर्फ पानी में तैरती है तो उसके आयतन का 1/10 भाग पानी के ऊपर, 9/10 भाग पानी के नीचे रहता है । अत: बर्फ का घनत्व 0.9 ग्राम/ सेमी³ होता है ।

इसी सिद्धांत द्वारा पानी मिले हुए अशुद्ध दूध में दुग्धमापी ( हेक्टोमीटर ) को डूबाकर दूध में मिश्रित जल की प्रतिशत मात्रा ज्ञात की जाती है ।

समुंद्र के जल का घनत्व साधारण जल से अधिक होता है । अत: समुद्री जल में तैरना आसान होता है ।

आपेक्षिक घनत्व = वस्तु का घनत्व / 4°C पानी का घनत्व

हाइड्रोमीटर ( Hydrometer) : – इससे तरल पदार्थों का आपेक्षिक घनत्व मापा जाता है । यह प्लवन के सिद्धांत पर आधारित है ।

प्लिमसोल रेखा – किसी जहाज पर अंकित वह चिह्न जिस सीमा तक जहाज के पानी में डूबने तक उस पर माल लादा जा सकता है ।

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