तुगलक वंश का इतिहास : दिल्ली सल्तनत

तुगलक वंश का इतिहास ( Tuglak Vansh History In Hindi)

 खिलजी वंश के खुसरो खाँ को पराजित करके गाजी मलिक या तुगलक गाजी गयासुद्दीन तुगलक ने तुगलक वंश ( tuglak dynasty) की स्थापना की ।

तुगलक वंश : ( 1320-1398 ई.)

(1) गयासुद्दीन तुगलक ( 1320-25 ई.)
(2) मुहम्मद बिन तुगलक ( 1325- 51 ई.)
(3) फिरोज तुगलक ( 1351-88 ई.)
(4) नासिरुद्दीन महमूद तुगलक ( 1398 ई.)

तुगलक वंश का इतिहास
तुगलक वंश का इतिहास

तुगलक वंश के शासक –

गयासुद्दीन तुगलक

खुसरव शाह की हत्या करके गाजी मलिक अथवा तुगलक गाजी गयासुद्दीन तुगलक 1320 ई. में दिल्ली का सुल्तान बना । सुल्तान बनते ही उसे प्रांतीय विद्रोह का सामना करना पड़ा ।

गयासुद्दीन ने अलाउद्दीन खिलजी के समय में लिए गए अमीरों की भूमि को पुन: लौटा दिया । इसने सिंचाई के लिए कुएँ एवं नहरों का निर्माण करवाया। संभवत: नहरों का निर्माण करने वाला गयासुद्दीन प्रथम शासक था ।

किसानों की स्थिति में सुधार करना और कृषि योग्य भूमि में वृद्धि करना उसके दो मुख्य उद्देश्य थे । उसने ‘मुकद्दम’ तथा ‘खूतों’ को उनके पुराने अधिकार लौटा दिए । भूराजस्व की दर को 1/3 कर दिया ।

गयासुद्दीन तुगलक ने दिल्ली के समीप स्थित पहाड़ियों पर तुगलकाबाद नाम का एक नया नगर स्थापित किया । रोमन शैली में निर्मित इस नगर में एक दुर्ग का निर्माण भी हुआ । इस दुर्ग को छप्पनकोट के नाम से भी जाना जाता है ।

गयासुद्दीन तुगलक ने 29 बार मंगोल आक्रमण को विफल किया । उसकी सेना में गिज, तुर्क, मंगोल, रूमी, ताजिक, खुरासानी, मेवाती एवं दोआब के राजपूत सैनिक शामिल थे ।

तेलंगाना के राजा प्रताप रूद्रदेव के खिलाफ उसने अपने पुत्र जूना खां को वारंगल भेजा । जाजनगर (उड़ीसा ) में सैन्य अभियान किया गया जिसमें उलूग खाँ( जूना खाँ) की विजय हुई ।

गयासुद्दीन का अंतिम सैन्य अभियान बंगाल के विद्रोह का दमन था । गयासुद्दीन तुगलक की मृत्यु 1325 ईस्वी में बंगाल के अभियान से लौटते समय जूना खाँ द्वारा निर्मित लकड़ी के महल में दबकर हो गई ।

मुहम्मद बिन तुगलक

गयासुद्दीन तुगलक की मृत्यु के बाद उसका पुत्र जूना खाँ ‘मुहम्मद बिन तुगलक’ के नाम से दिल्ली की गद्दी पर बैठा । अपनी सनक भरी योजनाओं, क्रुर कृत्यों एवं दूसरों के सुख-दुख के प्रति उपेक्षा का भाव रखने के कारण उसे ‘स्वप्नशील’, ‘पागल’ एवं रक्त पिपासु कहा गया है ।

दिल्ली सल्तनत के सुल्तानों में मुहम्मद बिन तुगलक सर्वाधिक विलक्षण व्यक्तित्व वाला शासक भी था । वह अरबी एवं फारसी का महान विद्वान तथा ज्ञान विज्ञान की विभिन्न विधाओं जैसे- खगोल शास्त्र, दर्शन, गणित, चिकित्सा विज्ञान, तर्कशास्त्र आदि में पारंगत था ।

उसका नाम कई संज्ञाओं से जोड़ा गया – “अन्तर्विरोधों का विस्मयकारी मिश्रण” , “रक्त का प्यासा “ आदि ।

उसके शासनकाल में 1333 ईसवी में अफ्रीकी(मोरक्को ) यात्री इब्नबतूता भारत आया था । सुल्तान ने इसे दिल्ली का काजी नियुक्त किया । 1342 ईसवी में सुल्तान ने इसे अपने राजदूत के रूप में चीन में तोगन तिमूर के दरबार में भेजा । इस यात्री ने मुहम्मद तुगलक के समय की घटनाओं को अपनी पुस्तक रेहला में उल्लेख किया है

इब्नबतूता के अनुसार उस समय तुगलक साम्राज्य 23 प्रांतों में बँटा हुआ था । कश्मीर एवं आधुनिक बलूचिस्तान को छोड़कर लगभग सारा हिंदुस्तान दिल्ली सल्तनत के नियंत्रण में था । इसने अपनी पुस्तक में विदेशी व्यापारियों के आवागमन, डाक चौकियों की स्थापना एवं गुप्तचर व्यवस्था के बारे में लिखा है ।

मोहम्मद बिन तुगलक ने कृषि के विकास के लिए ‘अमीर- ए- कोही’ नामक एक नवीन विभाग की स्थापना की । इसने अपनी राजधानी दिल्ली से देवगिरी में स्थानांतरण की और इसका नाम दौलताबाद रखा ।

सांकेतिक मुद्रा के अंतर्गत मुहम्मद बिन तुगलक ने काँसा ( फरिश्ता के अनुसार ), ताँबा ( बरनी के अनुसार ) धातुओं के सिक्के चलवाए , जिनका मूल्य चाँदी के रुपए टंका के बराबर होता था । एडवर्ड थॉमस ने मुहम्मद बिन तुगलक को “प्रिंस ऑफ मनीअर्स” (धनवानों का राजकुमार) की संज्ञा दी ।

मुहम्मद बिन तुगलक शेख अलाउद्दीन का शिष्य था । वह सल्तनत का पहला शासक था, जो अजमेर में शेख मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह और बहराइच में सालार मसूद गाजी के मकबरे में गया ।

इसने बदायूँ में मीरान मुलहीम,दिल्ली में शेख निजामुद्दीन औलिया , मुल्तान में रूकनुद्दीन, अजुधन में शेख मुल्तान आदि संतों की कब्र पर मकबरे बनवाएं ।

मुहम्मद बिन तुगलक की मुख्य योजनाएँ-

बरनी के अनुसार सुल्तान की पाँच मुख्य योजनाएँ निम्न प्रकार है –

(1) दोआब में कर वृद्धि ( 1326-27 ई.)
(2) देवगिरी को राजधानी बनाना ( 1326-27 ई.)
(3) सांकेतिक मुद्रा का प्रचलन ( 1329- 30 ई.)
(4) खुरासन पर आक्रमण
(5) कराचिल का अभियान

मुहम्मद तुगलक ने जिन प्रभा सूर नामक जैन-साधु के साथ विचार विमर्श किया था । मुहम्मद तुगलक की मृत्यु 20 मार्च, 1351ई. को सिंध जाते समय थट्टा के निकट गोडाल में हो गयी ।

इसकी मृत्यु पर इतिहासकार बदायूँनी लिखता है ,” अंतत: लोगों को उससे मुक्ति मिली और उसे लोगों से ” ।

नोट-

मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में दक्षिण में हरिहर एवं बुक्का नमक दो भाइयों ने 1336 ईसवी में स्वतंत्र राज्य विजयनगर की स्थापना की ।

महाराष्ट्र में अलाउद्दीन बहमन शाह ने 1347 ईस्वी में स्वतंत्र बहमनी राज्य की स्थापना की ।

फिरोज तुगलक

मोहम्मद बिन तुगलक की मृत्यु के बाद उसके चचेरा भाई फिरोज तुगलक का राज्याभिषेक थट्टा के नजदीक 20 मार्च 1351 ई. को हुआ । पुन: फिरोज का राज्याभिषेक दिल्ली में अगस्त, 1351ई.को हुआ । खलीफा द्वारा इसे कासिम अमीर उल मोममीन की उपाधि दी गई ।

राजस्व व्यवस्था के अंतर्गत फिरोज ने अपने शासनकाल में 24 कष्टदायक करों को समाप्त कर केवल चार कर – खराज (लगान), खुम्स ( युद्ध में लूट का माल ), जजिया एवं जकात को वसूल करने का आदेश दिया । फिरोज तुगलक ब्राह्मणों पर जजिया लागू करने वाला पहला मुसलमान शासक था ।

फिरोज तुगलक ने एक नया कर सिंचाई- कर भी लगाया जो उपज का 1/10 भाग था । फिरोज ने दिल्ली में खरबूजा तथा अंगूर की खेती को प्रोत्साहित किया और अनेक बाग लगवाये ।

फिरोज तुगलक ने पाँच बड़ी नहरों का निर्माण करवाया । एक नहर सतलज नदी से दीपालपुर के पास तथा दूसरी यमुना नदी से सिरमूर के पास खुदवाई गयी ।

इसके शासनकाल में खिज्राबाद ( टोपरा गाँव ) एवं मेरठ से अशोक के दो स्तम्भों को लाकर दिल्ली में स्थापित किया गया ।

फिरोज तुगलक ने 300 नए नगरों की स्थापना की । इनमें हिसार, फिरोजाबाद (दिल्ली) फतेहाबाद, जौनपुर, फिरोजपुर प्रमुख है ।

सुल्तान फिरोज तुगलक ने अनाथ मुस्लिम महिलाओं, विधवाओं एवं लड़कियों की सहायता के लिए एक नए विभाग दीवान- ए- खैरात की स्थापना की ।

सल्तनतकालीन सुल्तानों के शासनकाल में सबसे अधिक दासों की संख्या (करीब- 1,80000 ) फिरोज तुगलक के समय थी । दासों की देखभाल के लिए फिरोज ने एक नए विभाग दीवान-ए- बंदगान की स्थापना की ।

इसने सैन्य पदों को वंशानुगत बना दिया । उसने अपनी आत्मकथा फतूहात-ए-फिरोजशाही की रचना की । इसमें जियाउद्दीन बरनी एवं शम्स-ए- शिराज अफीफ को अपना संरक्षण प्रदान किया ।

इसमें ज्वालामुखी मंदिर के पुस्तकालय से लूटे गए 1300 ग्रंथों में से कुछ को फारसी में विद्वान अपाउद्दीन द्वारा ‘दलायते-फिरोजशाही’ नाम से अनुवाद करवाया ।

इसने चाँदी एवं ताँबे के मिश्रण से निर्मित सिक्के भारी संख्या में जारी करवाए, जिसे अद्धा एवं विख कहा जाता है । उसने अपने पुत्र फतेह खाँ को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त कर सिक्कों पर अपने नाम के साथ उसका नाम भी अंकित करवाया ।

फिरोज काल में निर्मित खान-ए-जहाँ-तेलंगानी के मकबरा की तुलना जेरूसलम में निर्मित उमर के मस्जिद से की जाती है ।

सुल्तान फिरोज तुगलक ने दिल्ली में कोटला फिरोजशाह दुर्ग का निर्माण करवाया । उसकी मृत्यु सितंबर 1388 ईस्वी को हो गई ।

नासिरुद्दीन महमूद तुगलक

तुगलक वंश का अंतिम शासक नासिरुद्दीन महमूद तुगलक था । इसका शासन दिल्ली से पालम तक ही रह गया था ।

तैमूरलंग ने सुल्तान नासिरूद्दीन महमूद तुगलक के समय 1398 ईसवी में दिल्ली पर आक्रमण किया ।

इसके समय में ही मलिकुशर्शक की उपाधि धारण कर एक हिजड़ा मलिक सरवर ने जौनपुर में एक स्वतंत्र राज्य की स्थापना की ।

इन्हें भी देखें-

Leave a Reply

error: Content is protected !!
Scroll to Top