भारतीय संविधान सभा

Samvidhan Sabha

 संविधान निर्माण करने के लिए गठित प्रतिनिधि सभा को “संविधान सभा” की संज्ञा दी जाती है । विश्व में संविधान सभा का विचार देने वाला व्यक्ति ब्रिटेन का राजनीतिक विचारक सर हेनरी मेन था । भारत में संविधान सभा राष्ट्रीय आंदोलन की मांग थी ।

Samvidhan Sabha
Samvidhan Sabha

भारत में संविधान सभा का सर्वप्रथम विचार सन् 1895 में स्वराज्य विधेयक में व्यक्त हुआ । जिसे गंगाधर तिलक के निर्देशन में तैयार किया गया था । 1922 में महात्मा गांधी ने घोषणा की कि “भारत का राजनीतिक भविष्य स्वयं भारतवासी तैयार करेंगे ” ।

सन् 1928 में मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में संविधान का प्रारूप तैयार किया गया । यह नेहरू प्रतिवेदन के रूप में लोकप्रिय हुआ ।

संविधान सभा के विचार का औपचारिक प्रतिपादन एम.एन.राय ने किया तथा इस विचार को लोकप्रिय बनाने का कार्य जवाहर लाल नेहरू ने किया । सन् 1938 में जवाहर लाल नेहरू ने वयस्क मताधिकार द्वारा निर्वाचित संविधान सभा का विचार प्रस्तुत किया ।

प्रारंभ में मुस्लिम लीग ने संलिधान सभा का विरोध किया ,किन्तु 1940 में पाकिस्तान प्रस्ताव के प्रतिपादन के साथ ही दो पृथक संविधान सभा की मांग प्रारंभ कर दी ।

मार्च 1940 में मुस्लिम लीग के लाहौर अधिवेशन में पहली बार अलग पाकिस्तान देश के निर्माण का प्रस्ताव पारित किया गया । पाकिस्तान शब्द की परिकल्पना चौधरी रहमत अली ने दी । मोहम्मद अली जिन्ना -” हिंदू एवं इस्लाम न केवल 2 धर्म है वरन् दो अलग-अलग राष्ट्रीयता है ।”

अगस्त 1940 में वायसराय लार्ड लिनलिथगो द्वारा प्रस्तुत “अगस्त प्रस्ताव” में ब्रिटिश सरकार की ओर से पहली बार संविधान सभा की बात को स्वीकार किया । भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अगस्त प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था ।

सन् 1942 में क्रिप्स प्रस्ताव में भी इसे दोहराया गया । कांग्रेस ने क्रिप्स प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया । गांधीजी के अनुसार “क्रिप्स प्रस्ताव दिवालिया बैंक के नाम भविष्य की तिथि में भुनाया जाने वाला चेक है ।”

अन्तत: 1946 में कैबिनेट मिशन योजना द्वारा भारतीय संविधान सभा के प्रस्ताव को स्वीकार कर इसे व्यवहारिक रूप दिया गया ।

केबिनेट मिशन
फरवरी 1946 को ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लीमेण्ट एटली ने 3 कैबिनेट मंत्रियों – सर स्टेफोर्ड क्रिप्स,पेथिक लोरेंस तथा ए.वी. एलेक्जेण्डर को भारत भेजने की घोषणा की । जिसका कार्य भारत में संविधान सभा के गठन हेतु सुझाव देना था । 24 मार्च 1946 को कैबिनेट मिशन भारत पहुंचा तथा 16 मई 1946 को अपनी योजना प्रकाशित की । इस मिशन में दो संविधान सभा की मांग को ठुकरा दिया लेकिन उसने ऐसी संविधान सभा के निर्माण की योजना सामने रखी, जिसने मुस्लिम लीग को काफी हद तक संतुष्ट कर दिया ।

संविधान सभा के सदस्यों की कुल संख्या 339 निश्चित की गयी थी, जिनमें 292 ब्रिटिश प्रान्तों के प्रतिनिधि, चार चीफ कमिश्नर क्षेत्र के प्रतिनिधि एवं 93 देशी रियासतों के प्रतिनिधि थे ।

सदस्य संख्या के निर्धारण का आधार जनसंख्या थी । 10 लाख की जनसंख्या पर एक प्रतिनिधि चुने जाने का प्रावधान किया गया ।

प्रत्येक ब्रिटिश प्रांत को आवंटित की गई सीटों का निर्धारण तीन प्रमुख समुदायों के बीच उनकी जनसंख्या के अनुपात में किया जाना था । ये तीन समुदाय थे- मुस्लिम, सिख व सामान्य ।

संविधान सभा में ब्रिटिश प्रांत के 296 प्रतिनिधियों का विभाजन सांप्रदायिक आधार पर किया गया – 213 सामान्य ,79 मुसलमान तथा 4 सिक्ख ।

संविधान सभा के सदस्यों में अनुसूचित जनजाति के सदस्यों की संख्या 33 थी । संविधान सभा में महिला सदस्यों की संख्या 15 थी ।

प्रतिनिधियों का चुनाव प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा एकल संक्रमणीय मत प्रणाली द्वारा किया जाना था ।

संविधान सभा की 296 सीटों के लिए जुलाई- अगस्त 1946 में चुनाव हुआ । भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को 208, मुस्लिम लीग को 73 तथा छोटे दलों एवं निर्दलीयों को 15 सीटें मिली ।

2 सितंबर 1946 को जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन किया गया । अक्टूबर,1946 में मुस्लिम लीग मंत्रिमंडल में शामिल हो गई परंतु संविधान सभा की कार्यवाही का बहिष्कार किया ।

9 दिसंबर 1946 को संविधान सभा की प्रथम बैठक नई दिल्ली स्थित कौसिल चैम्बर के पुस्तकालय भवन में हुई । सभा के सबसे बुजुर्ग सदस्य डॉ सच्चिदानंद सिन्हा को सभा का अस्थायी अध्यक्ष चुना गया ।

नोट:- हैदराबाद एक ऐसी देशी रियासत थी,जिसके प्रतिनिधि संविधान सभा में सम्मिलित नहीं गए थे ।

द्वितीय बैठक 11 दिसंबर 1946 को डॉ राजेंद्र प्रसाद को संविधान सभा का अध्यक्ष एवं एच.सी मुखर्जी को उपाध्यक्ष चुना गया । बी एन राव को संवैधानिक सलाहकार नियुक्त किया गया ।

तीसरी बैठक 13 दिसंबर 1946 को जवाहरलाल नेहरू ने “उद्देश्य प्रस्ताव”पेश किया । इसमें संविधान बनाने के उद्देश्य एवं दर्शन की झलक थी । सविधान की प्रस्तावना इस उद्देश्य प्रस्ताव का संशोधित रूप है । 22 जनवरी 1947 को उद्देश्य प्रस्ताव पारित किए गए ।

29 अगस्त 1947 को भीमराव अंबेडकर की अध्यक्षता में सात सदस्यीय प्रारूप समिति का गठन किया गया – (१) डॉक्टर भीमराव अंबेडकर (अध्यक्ष ) , (२) गोपाल स्वामी आयंगर (३) अल्लादी कृष्णस्वामी अय्यर (४) कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी (५) सैय्यद मोहम्मद सादुल्ला (६) एन माधवराव (७) डीपी खेतान (1948 में इनकी मृत्यु के बाद टीटी कृष्णमाचारी को सदस्य बनाया गया )

संविधान सभा की प्रमुख समितियां एवं उनके अध्यक्ष-

(1) संचालन समिति – डॉ राजेंद्र प्रसाद

(2)संघीय संविधान समिति – जवाहरलाल नेहरू

(3) प्रांतीय प्रधान समिति – सरदार वल्लभभाई पटेल

(4) प्रारूप समिति – डॉक्टर भीमराव अंबेडकर

(5) संघ शक्ति समिति – जवाहरलाल नेहरू

(6) राष्ट्रध्वज संबंधी तदर्थ समिति – डॉ राजेंद्र प्रसाद

(7) मौलिक अधिकारों एवं अल्पसंख्यक को संबंधित परामर्श समिति – सरदार वल्लभभाई पटेल

मौलिक अधिकारों एवं अल्पसंख्यक संबंधित परामर्श समिति की दो उपसमितियां थी –
(१) मौलिक अधिकार उपसमिति – जे बी कृपलानी

(२) अल्पसंख्यक उप समिति – एचसी मुखर्जी

देश विभाजन के बाद विधानसभा का पुनर्गठन 31 अक्टूबर 1947 को किया गया और 31 दिसंबर को संविधान सभा के सदस्यों की कुल संख्या 299 थी, जिसमें प्रांतीय सदस्यों की संख्या 229 एवं देसी रियासतों की संख्या 70 थी ।

प्रारूप समिति ने संविधान के प्रारूप पर विचार विमर्श करने के बाद 21 फरवरी 1948 को संविधानसभा को अपनी रिपोर्ट पेश की ।

संविधान सभा में संविधान का प्रथम वाचन 4 नवंबर से 9 नवंबर ,1948 तक चला । संविधान पर दूसरा वाचन 15 नवंबर 1948 को प्रारंभ हुआ ,जो 17 अक्टूबर 1949 तक चला । संविधान सभा में संविधान का तीसरा वाचन 14 नवंबर 1949 को प्रारंभ हुआ, जो 26 नवंबर 1949 तक चला और संविधान सभा द्वारा संविधान को पारित कर दिया गया । इस समय संविधान सभा के 284 सदस्य उपस्थित थे ।

संविधान निर्माण की प्रक्रिया में कुल 2 वर्ष, 11 महीना और 18 दिन लगे । संविधान के प्रारूप पर कुल 114 दिन बहस हुई । संविधान निर्माण कार्य में कुल मिलाकर 63,96,729 रूपये व्यय हुए ।

संविधान को जब 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा पारित किया गया , तब इसमें कुल 22 भाग, 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियां थी । वर्तमान समय में संविधान में 22 भाग, 395 अनुच्छेद एवं 12 अनुसूचियां हैं ।

संविधान के कुल अनुच्छेदों में से 15 को 26 नवंबर 1949 को प्रवर्तित कर दिया गया , जबकि शेष अनुच्छेदों को 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया ।

संविधान सभा की अंतिम बैठक 24 जनवरी 1950 को हुई और उसी दिन संविधान सभा के द्वारा डॉ राजेंद्र प्रसाद को भारत का प्रथम राष्ट्रपति चुना गया । 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हो गया ।

संविधान सभा द्वारा किए गए अन्य कार्य :-

(1) राष्ट्रीय ध्वज – 22 जुलाई 1947

(2) राष्ट्रमंडल में भारत की सदस्य स्थापित – मई,
1949

(3) राष्ट्रीय गान – 24 जनवरी 1950

(4) राष्ट्रीय गीत – 24 जनवरी 1950

(5) पाकिस्तान संविधानसभा – 26 जुलाई 1947

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