Rawal Allat । रावल अल्लट का इतिहास

राजपूत राजवंशों की उत्पत्ति में आज हम गुहिल/गहलोत/सिसोदिया वंश की बात करेंगे । इसमें हम आपको रावल अल्लट (Rawal Allat) के बारे में जानकारी उपलब्ध कराएंगे ।

Rawal Allat
Rawal Allat

रावल अल्लट का इतिहास ( Rawal Allat History in Hindi)

  • बप्पा रावल (कालभोज) के बाद उसका पुत्र खुमाण प्रथम मेवाड़ का शासक बना । कर्नल टॉड ने खुमाण प्रथम के समय बगदाद के खलीफा अलमायूँ द्वारा चित्तौड़ पर आक्रमण का उल्लेख किया ।
  • खुमाण प्रथम के बाद क्रमश: मत्तट,भर्तृभट्ट, खुमाण द्वितीय और महायक मेवाड़ के शासक हुए जिनका शासन काल मेवाड़ का पुन: पराभव काल कहा जाता है ।
  • खुमाण तृतीय (877-926 ई.) ने मेवाड़ को पराभाव की स्थिति से उभारा ।
  • खुमाण तृतीय का उत्तराधिकारी उसका पुत्र भर्तृभट्ट द्वितीय हुआ ।
  • भर्तृभट्ट द्वितीय ने राष्ट्रकूट वंश की रानी महालक्ष्मी से विवाह किया ।
  • भर्तृभट्ट द्वितीय के बाद उसका पुत्र अल्लट (आलूराव) मेवाड़ का स्वामी बना ।

रावल अल्लट (951-971 ई.)

  • यह 10 वीं सदी (951 ई.) में मेवाड़ का शासक बना । ख्यातों में अल्लट को आलु रावल कहा गया है ।
  • अल्लट ने हूण राजकुमारी हरिया देवी के साथ विवाह किया था ।
  • नौकरशाही अल्लट की काल से ही शुरू हुई थी, जो आज तक विद्यमान है ।
  • इसके शासन काल में आहड़ एक समृद्ध नगर व बड़े बड़े व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित हो चुका था ।
  • अल्लट ने आहड़ (आटपुर) अपनी दूसरी राजधानी बनाया ।
  • अल्लट के समय का एक शिलालेख सारणेश्वर शिवालय (आहड़) में मिला है, जिसमें आहड़ के एक अच्छा व्यापारिक नगर होने का उल्लेख है । इसमें अल्लट व उसके पुत्र नरवाहन सहित अल्लट के अमात्य आदि का वर्णन है ।
  • इसके समय आहड़ एक प्रमुख व्यापारिक व धार्मिक केंद्र हो जाने के फलस्वरूप दुर देशों यथा कर्नाट, मध्य देश , लाटा एवं तकादेश आदि व्यापारी वहां आकर मेवाड़ में बनी वस्तुएं क्रय करते थे और अपने देशों की बनी वस्तुएं यहां लाकर बेचते थे । साथ ही वे आहड़ में स्थित वराह मंदिर में दान आदि भी देते थे ।
  • अल्लट की मृत्यु 971 ई. में हुई तथा इसका उत्तराधिकारी इसका पुत्र नरवाहन हुआ ।

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