राज्यों की बहुउद्देशीय परियोजनाएँ 2021 ( July 2021)

Rajaon ki Bahuuddeshiya Pariyojana 2021

आज हम करंट अफेयर्स में राज्यों की बहुउद्देश्यीय परियोजनाएं 2021 के बारे में (Rajaon ki bahuuddeshiya pariyojana 2021 ) बात करेंगे जो आपके आने वाले एग्जाम में इनमें से एक या दो प्रश्न पूछे जाते हैं ।

Rajaon ki bahuuddeshiya pariyojana
Rajaon ki bahuuddeshiya pariyojana

2021 की राज्यों की सभी परियोजनाएँ

हेब्बल-नागवाड़ा घाटी परियोजना

कर्नाटक में लघु सिंचाई विभाग द्वारा हेब्बल-नागवाडा घाटी परियोजना के तहत झील का निर्माण किया जाएगा । यह परियोजना पानी की आपूर्ति के लिए एक संरक्षित जलाशय के रूप में कार्य करेगी ।

विश्वमित्री नदी परियोजना

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की प्रधान पीठ ने हाल ही में वडोदरा नगर निगम , गुजरात और अन्य अधिकारियों को विश्वामित्री नदी कार्य योजना को लागू करने के निर्देश दिए हैं , जिसमें सीमांकन, वृक्षारोपण और नदी की अखंडता को बनाए रखने की तैयारी शामिल है ।

सिल्वरलाइन परियोजना
इस परियोजना में राज्य के दक्षिणी हिस्से और केरल की राजधानी तिरुवंतपुरम को कासरगोड के उत्तरी हिस्से से जोड़ने के लिए राज्य में 1 सेमी हाई स्पीड रेलवे कॉरिडोर का निर्माण किया जाना शामिल है । इस परियोजना को वर्ष 2025 तक पूरा किया जाएगा ।

महाबाहु-ब्रह्मपुत्र परियोजना

18 फरवरी, 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम में “महाबाहु-ब्रह्मपुत्र” का शुभारंभ किया और दो पूलों की आधारशिला रखी ।

इस अवसर पर उन्होंने नीमाटी-माजुली द्वीप , उत्तरी गुवाहाटी- दक्षिणी गुवाहाटी और धुबरी-हाटसिंगिमारी के बीच रो-पैक्स सेवा का उद्घाटन किया ।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत के पूर्वी हिस्सों में निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करना है और इसमें ब्रह्मपुत्र और बराक नदी के आसपास रहने वाले लोगों हेतु विभिन्न विकास गतिविधियां शामिल है ।

नाग नदी प्रदूषण नियंत्रण परियोजना

2 मार्च 2021 को नाग नदी प्रदूषण नियंत्रण परियोजना को मंजूरी प्रदान की गई । इस परियोजना की कुल लागत राशि 2117.54 करोड़ रुपए हैं ।

प्रदूषण नियंत्रण की इस परियोजना की घोषणा नागपुर में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने की । इस परियोजना से अशोधित मैले पानी, बहते ठोस अपशिष्ट और नाग नदी एवं उसकी सहायक नदियों में बहने वाली अन्य अशुद्धियों के संदर्भ में प्रदूषण के स्तर को कम करना है ।

कोयंबटूर विकास परियोजनाएं

25 फरवरी, 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोयंबटूर में विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया और आधारशिला रखी । इस योजना की निर्माण लागत राशि ₹7800 करोड़ है ।

प्रधानमंत्री ने 1000 मेगावॉट की न्येवेली न्यू ताप बिजली परियोजना को राष्ट्र को समर्पित किया । इससे उत्पादित बिजली में से 65% बिजली तमिलनाडु को प्रदान की जाएगी ।

पुगलुर-त्रिशूर एचवीडीसी परियोजना

19 फरवरी, 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पॉवरग्रिड 320 केवी 2000 मेगावॉट की पुगलुर ( तमिलनाडु )- त्रिशूर ( केरल ) एचवीडीसी परियोजना का उद्घाटन किया । इस परियोजना की लागत राशि 5070 करोड़ रुपए है ।

2000 मेगा मागावॉट वाली अत्याधुनिक पुगलुर-त्रिशूर हाई वोल्टेज डायरेक्ट करंट प्रणाली , राष्ट्रीय ग्रिड के साथ केरल के लिए पहेली एचवीडीसी इंटर कनेक्शन है ।

यह परियोजना राज्य में बिजली की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ बड़ी मात्रा में बिजली ट्रांसमिशन की सुविधा प्रदान करेगी ।

कामेंग जल विद्युत परियोजना

12 फरवरी, 2021 को सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एनटीपीसी की सहायक उत्तर पूर्वी इलेक्ट्रिक पॉवर कॉर्पोरेशन लिमिटेड की कामेंग जल विद्युत परियोजना की चौथी ईकाई ने व्यावसायिक रूप से परिचालन प्रारंभ कर दिया है , जिसकी क्षमता 150 मेगावॉट है ।

यह परियोजना रन-ऑफ-द रिवर योजना के तहत विकसित की गई है । यह अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग जिला में स्थित है ।

भू-तापीय बिजली परियोजना

भारत की पहली भू-तापीय (Geothermal Power Project ) क्षेत्र विकास परियोजना पूर्वी लद्दाख के पुगा गाँव में स्थापित की जाएगी ।

पहले चरण हेतु परियोजना की स्थापना और कार्यान्वयन के संबंध में 6 फरवरी, 2021 को त्रीपक्षीय समझौता- ज्ञापन पर हस्ताक्षर ओएनजीसी एनर्जी , लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद्-लेह और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के विद्युत विभाग ने किए ।

इस परियोजना को वर्ष 2022 के अंत तक चालू करने की योजना है । इस परियोजना के तहत उन 10 पड़ोसी गांव को 24 घंटे मुक्त बिजली प्रदान की जाएगी , जो बिजली आपूर्ति के लिए उत्तरी ग्रिड से नहीं जुड़े हैं ।

लखवाड़ बहुउद्देश्यीय परियोजना

उत्तराखंड की 300 मेगावाट की लखवाड़ बहुउद्देश्यीय परियोजना को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने अपनी मंजूरी 4 फरवरी, 2021 को प्रदान कर दी ।

यमुना नदी पर स्थित इस परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया है । इस परियोजना से उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश को सिंचाई और पेयजल आपूर्ति के साथ ही विद्युत उत्पादन भी किया जाएगा ।

इस परियोजना के अंतर्गत उत्तराखंड के देहरादून के लोहारी गांव के निकट यमुना नदी पर 204 मीटर ऊंचा कंक्रीट बांध बनाया जा रहा है ।

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